टीकमगढ़ । ओरछा प्रदेश का क्षेत्र उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बीच में स्थित है।1960 के दशक की शुरुआत से इसके विकास को बढ़ावा देने के लिए अलग से राज्य बनाने की मांग चल रही है। समुचित क्षेत्र में पर्याप्त खनिज पदार्थ मौजूद है। यहां के पन्ना जिले के हीरे सबसे प्रसिद्ध रहे हैं। जो मध्यकाल से बहुत बेशकीमती रहे हैं। जब यह पत्थर केवल भारत में ही पाया जाता था। हालांकि बाद में ब्राजील और अफ्रीका में हीरे की खोज होने के बाद यहां के हीरे का मूल्य घट गया। यहां पर बेसाल्टिक और बलुआ पत्थर का काफी जमाव है। यहां पर दमोह, छतरपुर और दतिया में चूना पत्थर तथा दक्षिणी ललितपुर में बेसाल्टिक चट्टाने, पन्ना और सागर में बलुआ पत्थर पाया जाता है। प्रारंभिक काल से ही यहां ग्रेनाइट जैसी संरचनाएं पाए जाती हैं। जिन्हें बुंदेलखंड ग्रेनाइट कहा जाता है। झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर जिलो में गुलाबी लाल और ग्रे ग्रेनाइट पाए जाते हैं। सागर और पन्ना के कुछ हिस्सों में बहुरंगी और काली ग्रेनाइट पाए जाते हैं। छतरपुर जिले में पाई जाने वाली झांसी रेड और फार्च्यून रेड नाम की दो बेशकीमती किस्मे पाई जाती हैं। यहां पर सफेद, बफ, क्रीम, गुलाबी और लाल बलुआ पत्थर विंध्य की पहाड़ियों के विभिन्न परतों में पाई जाती हैं। जो मुख्यतः पन्ना और सागर जिला में है। इस बलुआ पत्थर का उपयोग विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बनाने में किया जाता है। ललितपुर में बलुआ पत्थर की दो प्रमुख किस्मे पायीं जातीं हैं। जिन्हें ललितपुर ग्रे और ललितपुर पीला कहा जाता है। बलुआ पत्थर की अन्य किस्मे छतरपुर में भी पाई जाती हैं। यहां पर पायरोफलेट नामक एक नरम और हल्के पत्थर निक्षेप पाए जाते हैं। जो मुख्यत झांसी, ललितपुर, महोबा, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में है। इसका उपयोग मुख्यतः सजावटी सामान बनाने के लिए किया जाता है। इसको दोस्पोर के साथ मिलाकर औद्योगिक उपयोग भी किया जाता है। यहां पर सड़कें और भवन निर्माण के लिए पर्याप्त मात्रा में चुना पत्थर पाया जाता है। जो मुख्यत सागर, दमोह और पन्ना जिलों में है। बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में पाई जाने वाली सिलिका रेत भारत में कांच निर्माण के लिए एक अच्छा स्रोत है। ललितपुर और छतरपुर में पाया जाने वाला रॉक फास्फेट का उपयोग उर्वरक उद्योग में किया जाता है। ललितपुर में निम्न श्रेणी के लौह अयस्क के भंडार भी हैं। दतिया, पन्ना और टीकमगढ़ में पाई जाने वाली मिट्टी का उपयोग चुना और सीमेंट उद्योग में किया जाता है। बांदा और सागर जिले में डोलोमाइट पाया जाता है। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां पर लगभग 11000 वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र बंजर भूमि के अंतर्गत आता है।बुंदेलखंड क्षेत्र की सीमा उत्तर में गंगा यमुना का मैदान तथा दक्षिण में विंध्याचल पर्वत बनाता है। यह मध्यम ढलान वाली उच्च भूमि है। समुद्र तल से ऊंचाई 600 मीटर है। प्रेस को यह तमाम जानकारी भूमिपुत्र पवन घुवारा ने व्हाट्सएप के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दी है।

