टीकमगढ़। जब जीवन की राहों में अंधकार गहराने लगता है, तब संवेदना की एक छोटी-सी किरण भी उम्मीद का सूरज बन जाती है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण टीकमगढ़ में देखने को मिला, जब मानवीय संवेदना समिति की पहल पर एक गरीब और असहाय महिला शगुन रैकवार के जीवन में खुशियों की नई शुरुआत हुई।
समिति ने शगुन रैकवार के लिए फल की दुकान खुलवाकर न केवल उसे रोज़गार से जोड़ा, बल्कि उसे आत्मनिर्भरता का संबल भी प्रदान किया। अब शगुन अपने बच्चों के साथ सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकेगी।
इस अवसर पर मानवीय संवेदना समिति की महिला शक्ति तथा समिति की टीम के सदस्यों ने संयुक्त रूप से दुकान का शुभारंभ किया। सभी उपस्थित सदस्यों ने इस पहल को समाजसेवा की दिशा में एक प्रेरक कदम बताया।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि “समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जो परिस्थितियों से हार चुके हैं, उन्हें बस एक सहारे की आवश्यकता होती है। यदि हर व्यक्ति थोड़ी संवेदना दिखाए, तो असंख्य जीवन संवर सकते हैं।”
शगुन रैकवार की आंखों में आज कृतज्ञता और आत्मविश्वास की चमक थी। मानवीय संवेदना समिति की यह पहल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि—
“जिसका कोई नहीं, उसका ऊपरवाला होता है, और कभी-कभी वह ऊपरवाला इंसानों के रूप में धरती पर उतर आता है।”

