टीकमगढ़। जब सर्द रात अपने चरम पर थी और गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था उसी वक्त मानवीय करुणा ने दस्तक दी। जिला टीकमगढ़ की ग्राम पंचायत नयाखेरा में लगभग रात 11 बजे जितेन्द्र क्रांतिकारी न केवल कंबल बल्कि उम्मीद की गर्माहट लेकर पहुंचे। ठंड से कांपते बच्चों के चेहरों पर उस रात मुस्कान लौट आई जब उन्हें पहनने के लिए कपड़े और ओढ़ने के लिए कंबल मिले।
इस मानवीय पहल की शुरुआत रात करीब 9 बजे हुई जब जितेन्द्र क्रांतिकारी बैकुंठी में अशोक सक्सेना के निवास पर चाय पी रहे थे। तभी नरेन्द्र यादव का फोन आया। फोन पर उन्होंने व्यथित स्वर में बताया कि नयाखेरा गांव के कुछ बच्चे कपड़ों के अभाव में ठंड से बीमार पड़ रहे हैं परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है और एक बिटिया को तो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह सुनते ही जितेन्द्र क्रांतिकारी ने बिना एक पल गंवाए गांववासियों को भरोसा दिलाया कि वे तत्काल कंबल और बच्चों के कपड़े लेकर स्वयं गांव पहुंचेंगे।
कथनी नहीं करनी में विश्वास रखने वाले जितेन्द्र क्रांतिकारी ने अपना वादा निभाया। रात 11 बजे वे टोपा मोजे गर्म कपड़े और कंबल लेकर नयाखेरा पहुंचे। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की हालचाल जाना और स्नेहपूर्ण हाथों से बच्चों को कपड़े पहनाए। वह दृश्य केवल सहायता का नहीं बल्कि संवेदना अपनत्व और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण था।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए नरेन्द्र यादव एवं गांववासियों ने बताया कि ठंड के कारण बच्चे लगातार बीमार हो रहे थे एक बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऐसी विकट परिस्थिति में जितेन्द्र क्रांतिकारी को फोन किया गया और उन्होंने आधी रात को भी साथ निभाया। गांववासियों ने एक स्वर में कहा कि ऐसे ही जमीनी और संवेदनशील नेताओं की आज समाज को जरूरत है, जो संकट की घड़ी में बिना देर किए साथ खड़े हों।
आधी रात की इस मानवीय पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जरूरतमंद के आंसुओं को समझे और समय पर सहारा बने। नयाखेरा के लोगों ने जितेन्द्र क्रांतिकारी का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा यह केवल सहायता नहीं बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल है।
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