नर्मदापुरम / भारत की वित्त मंत्री ने जब संसद में बजट पेश किया तो बजट को लेकर पक्ष के नेता खुश हुए लेकिन वही विपक्षी दलों के नेताओं ने बजट को पूंजी पतियों और आम आदमियों को लाभ को नहीं के बराबर बताया। केंद्रीय बजट 2026 संसद में पेश होते ही उसकी राजनीतिक और सामाजिक गूंज नर्मदापुरम तक सुनाई देने लगी है। देशभर में बजट को लेकर शुरू हुई बहस का असर जिले में भी साफ नजर आ रहा है। सत्ता पक्ष जहां केंद्र सरकार के बजट को वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की दिशा में अहम कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इस बजट को आम जनता की अपेक्षाओं से दूर करार दिया है।
नर्मदापुरम में भाजपा नेताओं का कहना है कि यह बजट पूरे देश के लिए प्रस्तुत किया गया है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर विकास को गति देना है। उनका मानना है कि बजट में किए गए प्रावधानों का सकारात्मक प्रभाव समय के साथ प्रदेश और जिले जैसे क्षेत्रों तक भी पहुंचेगा। सांसद डॉ. दर्शन सिंह (चौधरी) ने कहा कि कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर जोर देने से देशभर के किसानों को लाभ मिलेगा, जिसका असर नर्मदा अंचल के अन्नदाताओं पर भी देखने को मिलेगा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार से जुड़े प्रावधानों को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बताते हुए कहा कि इससे नर्मदापुरम जैसे व्यापारिक क्षेत्रों को भी आगे चलकर गति मिलेगी। सांसद माया नारोलिया ने बजट को नारी सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया कदम बताया, जबकि विधायक विजयपाल सिंह ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला करार दिया। भाजपा जिला अध्यक्ष प्रीति शुक्ला के अनुसार बजट में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है और इसकी झलक जमीनी स्तर पर भी दिखाई देगी। वहीं नर्मदापुरम में कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अलग नजर आई। कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुड्डन पांडे ने कहा कि बजट भले ही देश के लिए पेश किया गया हो, लेकिन आम जनता को इससे तत्काल राहत नहीं मिलती दिख रही है। कांग्रेस नेता धर्मेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि बजट में बड़े उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं है। किसान नेता पुष्पराज पटेल ने कहा कि सरकार तकनीक की बात तो कर रही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित समर्थन मूल्य देने को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। कुल मिलाकर, देश के आम बजट को लेकर नर्मदापुरम में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। जहां एक पक्ष इसे भविष्य का रोडमैप बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे आम आदमी से जुड़ी समस्याओं से कटा हुआ मान रहा है। आने वाले समय में यह बजट देश के साथ-साथ नर्मदापुरम जैसे जिलों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

पत्रकार कुणाल पासवान
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