टीकमगढ़। नगर में आयोजित भव्य श्री पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आस्था के वातावरण में मनाया गया। पूरे आयोजन स्थल पर धर्ममय वातावरण छाया रहा और श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातः 8 बजे प्रारंभ हुआ गजरथ महोत्सव इस दिन का मुख्य आकर्षण रहा। सुसज्जित हाथियों के साथ भगवान के रथ की भव्य नगर परिक्रमा मानस मंच राजेंद्र पार्क से प्रारंभ होकर ताल दरवाजा, कटरा बाजार, सिंधी धर्मशाला मार्ग से होते हुए महावीर जिनालय पहुंची। मार्ग में जगह-जगह रंगोलियां सजाई गईं, आरती उतारी गई और अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं व जनप्रतिनिधियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। “जय जिनेंद्र” के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा और हजारों की संख्या में श्रद्धालु रथयात्रा के दर्शन के लिए उपस्थित रहे।
मोक्ष कल्याणक की पावन क्रिया अत्यंत भाव-विभोर वातावरण में सम्पन्न हुई, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। गजरथ यात्रा में दयोदय म्यूजिकल ग्रुप, वर्धमान ग्रुप, आदिनाथ ग्रुप, अहिंसा ग्रुप सहित विभिन्न धार्मिक मंडलियों की सक्रिय भागीदारी रही। महाराष्ट्र का नादली बैंड, उदयपुर (राजस्थान) का बैंड तथा महिला रेजीमेंट्स पारंपरिक वेशभूषा में भगवान के मंगल गीत प्रस्तुत करती चल रही थीं।
इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं, मंदिर समितियों, वीर व्यायाम शाला, मुनि सेवा संघ, पारसनाथ भक्ति समिति, अतिशय क्षेत्र पपौरा जी समिति, सिद्ध क्षेत्र आहार जी समिति सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारी, पंडित, विद्वान, जैन पाठशालाओं के बच्चे, महिला मंडल, युवा संगठन एवं सामाजिक समूहों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि शांति बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होती है। उन्होंने कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में जो होता है, वह नियति के अनुसार होता है। आत्मा शाश्वत है और कभी परिवर्तित नहीं होती, इसलिए मनुष्य को स्वयं में परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने मानव जीवन को दुर्लभ बताते हुए सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा और सद्भाव रखने का संदेश दिया तथा राग-द्वेष त्यागकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। बुंदेलखंड की पावन भूमि की सराहना करते हुए उन्होंने समाज में प्रेम, सौहार्द और वत्सलता बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में महावीर जिनालय समिति द्वारा सभी सहयोगियों का माला और मुकुट पहनाकर सम्मान किया गया तथा समस्त टीकमगढ़ वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक जागृति का अनुपम संचार किया।
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