पदोन्नति में पक्षपात: मंत्रालय कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा, कहा- ‘आग पानी से बुझती है, घी से नहीं’ I
भोपाल/इटारसी। मध्यप्रदेश में पिछले एक दशक से रुकी हुई पदोन्नतियों को लेकर मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि प्रदेश की नौकरशाही ‘पलायन और पक्षपात’ की जुगलबंदी का शिकार हो गई है, जिसका सीधा असर प्रदेश के सुशासन और आठ करोड़ जनता पर पड़ रहा है।
बड़े अधिकारियों को ‘तुरंत’ तरक्की, छोटों को ‘इंतजार’
विज्ञप्ति में नौकरशाही के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि जहाँ उच्चाधिकारियों की पदोन्नति में एक दिन की भी देरी नहीं होती—सुबह पद खाली होता है और शाम को आदेश निकल जाता है—वहीं छोटे कर्मचारी पिछले 10 साल से एक ही पद पर काम करने को मजबूर हैं। लोक प्रशासन के सिद्धांत का हवाला देते हुए संघ ने कहा कि पदनाम न बदलने से कर्मचारियों में भारी निराशा है।
समाधानों की अनदेखी का आरोप
इंजीनियर सुधीर नायक ने दावा किया कि उन्होंने शासन को कई निर्विवाद समाधान सुझाए थे, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उनके प्रमुख सुझाव निम्नलिखित थे:
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उच्च पदनाम: राज्य प्रशासनिक सेवा की तर्ज पर समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम दिया जाए।
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आरक्षण का संतुलन: पदोन्नति में 36% और 64% का फार्मूला लागू हो, जिससे कोई भी वर्ग एक-दूसरे के हक का अतिक्रमण न करे।
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बैक डेट से पदोन्नति: साल 2016 से बंद पड़ी पदोन्नतियों को उसी तिथि से बहाल किया जाए।
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वरिष्ठता का सम्मान: किसी भी स्थिति में जूनियर कर्मचारी को सीनियर के ऊपर पदोन्नत न किया जाए।
‘सुशासन के लक्ष्य में बाधक है निरुत्साहित कर्मचारी’
संघ का कहना है कि जब कर्मचारी उत्साहहीन होगा, तो उससे कार्यकुशलता और तत्परता की उम्मीद करना बेमानी है। मंत्रालय संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इन न्यायसंगत समाधानों को लागू किया जाता, तो विवाद कब का शांत हो गया होता, लेकिन वर्तमान स्थिति “आग में घी डालने” जैसी बनी हुई है।

