द्वारिकाधीश मंदिर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ: भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ l
इटारसी। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर स्थानीय ठाकुर श्री द्वारकाधीश मंदिर में एक माह तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला शुरू हो चुकी है। इस कड़ी में रविवार से सेन परिवार द्वारा आयोजित प्रथम श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक चली इस कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
यह कथा मुख्य यजमान राजाराम सेन, श्रीमती इंदिरा सेन, आशीष सेन एवं श्रीमती झलक सेन द्वारा अपने पूर्वजों—स्व. चेतराम सेन एवं स्व. श्रीमती लुडकई बाई सेन की पावन स्मृति में कराई जा रही है।
भव्य कलश यात्रा और विहंगम पूजन
कथा के शुभारंभ पर प्रातः 10:00 बजे सातवीं लाइन स्थित हनुमान मंदिर से एक विशाल कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों से होती हुई ठाकुर श्री द्वारकाधीश मंदिर पहुंची, जहाँ श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा की। इसके पश्चात ठाकुर जी की विहंगम प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
विशेष आकर्षण: कलश यात्रा में सिवनी मालवा से आया ‘गजानंद बैंड’ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
पुष्प वर्षा से स्वागत: एक विशेष रथ पर कथा व्यास भागवत भूषण पंडित सौरभ दुबे (बिछुआ) विराजमान थे। नगर में जगह-जगह मंच लगाकर और पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का अभूतपूर्व स्वागत किया गया।
भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप: प. सौरभ दुबे
कलश यात्रा के बाद मुख्य यजमान परिवार ने व्यास पीठ और श्रीमद्भागवत पोथी का पूजन कर कथा व्यास पंडित सौरभ दुबे को तिलक लगाकर विराजित कराया।
प्रथम दिवस की कथा में नारद-भक्ति संवाद का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास प. सौरभ दुबे ने भागवत महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“मृत्यु के सत्य को जान लेने से मन का भय मिट जाता है। जिस प्रकार राजा परीक्षित ने भागवत कथा श्रवण कर अभय पद को प्राप्त किया, वैसे ही यह कथा हर जीव को अभय बना देती है। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का साक्षात अक्षर स्वरूप और परमहंसों की संहिता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाती है। अधिक मास में इसके श्रवण का विशेष महत्व है, क्योंकि यह ग्रंथ वेद और उपनिषदों का सार रूपी फल है। यह वह अमृत है जो देवताओं को भी दुर्लभ है। इसके श्रवण से पापी से पापी व्यक्ति का भी कल्याण हो जाता है।
समाज जनों और श्रद्धालुओं ने किया स्वागत
कथा के दौरान व्यास पीठ का स्वागत कुंदन श्रीवास, रक्षा श्रीवास, दिनेश श्रीवास, सुरक्षा श्रीवास, विकास श्रीवास, प्रतीक्षा श्रीवास, कृष्णा सेन, मालती सेन, संतोष सेन और उपेंद्र सराठे द्वारा किया गया।
इस अवसर पर सेन समाज के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओम सेन, जिला अध्यक्ष धीरज सराठे, समाज के संरक्षक राकेश सेन सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने जगह-जगह कलश यात्रा की अगवानी की।
आज का विचार:श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण केवल कानों का रस नहीं, बल्कि जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को प्रतिष्ठित करने का दिव्य माध्यम है।

