टीकमगढ़ के ऐतिहासिक नजरबाग में हजरत सैय्यद इल्हान शाह बाबा चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 83वां उर्स मुबारक इस वर्ष ऐसी रूहानी अकीदत और अदबी शान के साथ सम्पन्न हुआ, जिसकी गूंज देर रात तक सूफियाना कलामों, इबादत और इंसानी मोहब्बत के रूप में फिजाओं में महसूस की जाती रही। 18 से 20 मई 2026 तक चले इस तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन ने न केवल आस्था का रंग बिखेरा, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक समरसता और भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे शहर लंबे समय तक याद रखेगा।
दरगाह शरीफ के आंगन में जैसे ही मशहूर कव्वालों की आवाज़ गूंजी —
“अजमेर की गलियों में नूर बरसता है…”
तो पूरा माहौल इश्क-ए-हकीकी की खुशबू से महक उठा।
महफिल-ए-कव्वाली में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कव्वाल अनस-जुनेद, अनीस नवाब गुजरात और जनाब शब्बीर सदाकत साबरी राजस्थान ने अपने सूफियाना कलामों से ऐसी रूहानी कैफियत पैदा की कि अकीदतमंद रातभर झूमते रहे। तबले की थाप, हारमोनियम की मिठास और सूफी कलामों की तासीर ने हर दिल को सजदा करने पर मजबूर कर दिया।
जब कव्वालों ने पढ़ा —
“ओ पालनहारे… उस्मा के प्यारे…”
तो महफिल में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो उठीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दरगाह शरीफ पर रहमतों की बारिश उतर आई हो।
उर्स मुबारक के समापन अवसर पर पूर्व मंत्री एवं टीकमगढ़ विधायक दादा यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने अपने समर्थकों के साथ दरगाह पहुंचकर चादर पेश की और प्रदेश तथा देश में अमन, चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और इंसानियत का रास्ता दिखाते हैं।
उर्स में कांग्रेस नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न समुदायों के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। दरगाह परिसर में हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सहित सभी समाजों के लोग एक साथ नजर आए। किसी के हाथ दुआ के लिए उठे थे, तो किसी के दिल में इंसानियत और मोहब्बत की लौ जल रही थी। यही वह तस्वीर थी जिसने उर्स मुबारक को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का उत्सव बना दिया।
18 मई को आयोजित सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन भी इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। विभिन्न समाजों के नवदंपत्तियों ने एक साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। इस अवसर पर पूरे वातावरण में आशीर्वाद, अपनापन और सामाजिक समरसता का भाव दिखाई दिया।
20 मई को उर्स मुबारक के समापन अवसर पर आयोजित भव्य अदबी कव्वाली कार्यक्रम में अनीस नवाब और शब्बीर सदाकत साबरी के बीच शानदार मुकाबला-ए-कव्वाली हुआ। सूफी कलामों की इस रूहानी जंग ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रातभर लोग “वाह-वाह” और “माशाअल्लाह” की सदाओं के बीच झूमते रहे।
कार्यक्रम में अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक, सूर्य प्रकाश मिश्रा, महेंद्र जैन, लक्ष्मण रैकवार, गौरव शर्मा, जितेंद्र जैन क्रांतिकारी, संजय नायक, अनीस अहमद, डॉ. इसरार मोहम्मद, टीपू खान, रजनी जायसवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में संयोजक अमानत उल्ला खां “टिंकू”, अध्यक्ष गौरव शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष नवाब खान “गोलंदाज”, बफाती खां, नासिर हुसैन, ध्रुव यादव, दुश्यंत सिंह दाऊ, मुमताज अली बब्लू, रानू मिश्रा, अजमत उल्ला शाना, शकील खां “सरदार सिंह बैंक”, सूर्य प्रकाश मिश्रा “दद्दी” तथा कोषाध्यक्ष इनायत खान सहित पूरी आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समापन अवसर पर संयोजक अमानत उल्ला खां “टिंकू” ने सभी अतिथियों, कव्वालों, समाजसेवियों और नगरवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों के सहयोग और बाबा की मेहरबानी से यह उर्स ऐतिहासिक रूप से सफल हुआ है। वहीं कोषाध्यक्ष इनायत खान ने कहा कि अहले शहर और मजार कमेटी के भरपूर सहयोग ने इस आयोजन को नई ऊंचाई प्रदान की।
तीन दिनों तक नजरबाग की फिजाओं में बस एक ही सदा गूंजती रही—
“सबने मिलकर सदा लगाई… देता है प्यार इल्हान शाह सरकार…”
और सचमुच, यह उर्स मुबारक केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत, सूफियत और कौमी एकता का ऐसा उजला पैगाम बन गया, जिसने हर दिल को छू लिया।
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