टीकमगढ़। जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। मध्यप्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ के बैनर तले पहुंचे कर्मचारियों ने नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और वेतन कटौती पर रोक लगाने सहित कई मांगें उठाईं।
संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं वर्षों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। जन्म पंजीयन, पोषण अभियान, टीकाकरण, मतदाता पुनरीक्षण और लाड़ली बहना योजना जैसी विभिन्न योजनाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल रहा है।
संघ ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से मानदेय में कटौती की जा रही है तथा सेवा से पृथक करने की धमकी भी दी जाती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अल्प मानदेय में परिवार का पालन-पोषण करना पहले ही कठिन है, ऐसे में वेतन कटौती से उनकी समस्याएं और बढ़ रही हैं।
ज्ञापन में मांग की गई कि महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को राज्य कर्मचारियों की तरह नियमित किया जाए और शासकीय सुविधाओं का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही मानदेय में कम से कम पांच हजार रुपये की वृद्धि, 65 वर्ष तक सेवा अवधि तथा पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई।
संघ ने सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने और आर्थिक सहायता राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने की भी मांग की। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों पर नियमित पोषाहार आपूर्ति सुनिश्चित करने, अतिरिक्त विभागीय कार्यों से मुक्त रखने और सेवा से पृथक करने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
प्रदेश महामंत्री संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।
फिलहाल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की मांगों पर शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है।
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