पत्रकारों के आवास और सुरक्षा के मुद्दों पर हर स्तर पर प्रयास हों, पत्रकारों को एकजुट होना चाहिए: प्रियंक कानूनगो l
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य पहुँचे पत्रकार भवन; परिचर्चा और संवाद कार्यक्रम आयोजित
नर्मदापुरम।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (भारत सरकार) के सदस्य और कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त प्रियंक कानूनगो बुधवार को नर्मदापुरम पहुँचे। इस दौरान कलेक्ट्रेट स्थित पत्रकार भवन में एक विशेष परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर्मदांचल पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी सहित सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों, सदस्यों, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों, अधिवक्ताओं और विशिष्ट जनों ने श्री कानूनगो का माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें माँ नर्मदा का छायाचित्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
‘पत्रकार ही हम तक पहुँचाते हैं खबर’
परिचर्चा के दौरान श्री कानूनगो ने मानवाधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए मीडियाकर्मियों के विचारों व समस्याओं को सुना। उन्होंने समाज में पत्रकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “पत्रकार ही हम तक खबरें पहुँचाते हैं।”
देश में मीडिया के विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि साल 2014 के बाद देश में पत्र-पत्रिकाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो अब बढ़कर करीब 1 लाख 50 हजार तक पहुँच गई है। वर्तमान में 4 लाख से ज्यादा पत्रकार फील्ड में काम कर रहे हैं और 200 से अधिक टीवी चैनल डिजिटल रूप में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब के इस दौर में पत्रकारों की संख्या और दायरा काफी बढ़ा है।
सुरक्षा और आवास पत्रकारों का बुनियादी अधिकार
श्री कानूनगो ने जोर देकर कहा कि विपरीत परिस्थितियों में निष्पक्ष पत्रकारिता करना आज के दौर में एक बड़ी चुनौती है। पत्रकार समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं, इसलिए उनकी सामाजिक और भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
“पत्रकारों की सुरक्षा और आवास की व्यवस्था उनका बुनियादी अधिकार है और इसे लेकर हर स्तर पर ठोस प्रयास होने चाहिए। पत्रकारों के लिए सुरक्षित और सुलभ आवास की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपने दायित्वों का निर्वाह कर सकें। फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के खिलाफ होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।”
— प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
उन्होंने अतीत का एक संस्मरण साझा करते हुए पत्रकार बिरादरी से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार एक ही बिरादरी का होता है, इसमें कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। संकट के समय हमें एक-दूसरे की मदद की आवश्यकता होती है, इसलिए एकता अनिवार्य है।
स्थानीय समस्याओं पर सकारात्मक पहल का भरोसा
संवाद के दौरान पत्रकारों ने अपनी स्थानीय समस्याओं, विशेषकर आवास आवंटन, बीमा, मानदेय और कार्यस्थल पर आने वाली सुरक्षा संबंधी अड़चनों से श्री कानूनगो को अवगत कराया। इस पर उन्होंने स्थानीय प्रशासन और शासन स्तर पर पत्रकारों की न्यायसंगत मांगों को सही मंच पर उठाने तथा सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
इस गरिमापूर्ण अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल तिवारी, बलराम शर्मा, धर्मेंद्र दीवान, राजेंद्र परिहार, मनोज चौरे, राजीव अग्रवाल, डॉ. सीमा केथवास, विजय कुंभारे, मनोज सोनी, विपिन महंत, मुकेश भदोरिया, कमल चाव्हाण, दयाराम फौजदार, मदन शर्मा, प्रदीप गुप्ता, रुद्र प्रताप, पुरुषोत्तम मालवीय, हेमंत राजपूत, एनडी दीक्षित मौजूद थे।
इनके साथ ही पूर्व अधिवक्ता प्रदीप चौरे, मनोज जराठे, के.एन. त्रिपाठी, इंद्र कुमार सोनी, अजय शर्मा, हिना अली, खुशबू बूलचंदानी, दुर्गेश राजपूत, देवेंद्र, गजेंद्र ठाकुर, दुर्गेश भट्ट, मनीष सोलंकी, राजीव दुबे, राजेश रैकवार, अनिल कहार, सौरभ परदेसी, डॉक्टर मयंक तोमर, मनोज यादव, अनूप तोमर, अनंत तिवारी, मनीष तिवारी, गोविंद चौधरी एवं गोलू अवस्थी सहित बड़ी संख्या में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार, अधिवक्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कार्यक्रम का सफल संचालन विजय कुंभारे ने किया एवं आभार प्रदर्शन बलराम शर्मा द्वारा किया गया।
पत्रकार कुणाल पासवान

