टीकमगढ़ । म.प्र.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं माननीय हितेन्द्र सिंह सिसौदिया प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टीकमगढ के मार्गदर्शन में दिनांक 03.12.2022 को सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग टीकमगढ़ के समंवय से विश्व दिव्यांग दिवस एवं अधिवक्ता दिवस के अवसर पर नजर बाग प्रागंण टीकमगढ़, ए.डी.आर. भवन टीकमगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम का आयेाजन किया गया । उक्त कार्यक्रम में माननीय विनोद कुमार पाटीदार सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर सत्र न्यायाधीश टीकमगढ़ ने उपस्थित सामान्यजन एवं दिव्यांगजन को दिव्यांग के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि दिव्यांग का अभिशाप प्रकृति ने प्रत्येक राष्ट्र को दिया है। यह अलग बात है कि श्राप का प्रभाव विकसित राष्ट्रों में कम पड़ा हो और विकासशील राष्ट्रों में अधिक । इसलिए यह विश्व समस्या हैं। विश्व समस्या होने के नाते संयुक्त राष्ट्र संध ने इस श्राप से मुक्ति का दायित्व समक्षा और प्रत्येक वर्ष 03 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा । इसलिए विकलांग के प्रति चिन्तन मनन का दिन है, 03 दिसंबर । दिव्यांग या अंग विकृति जन्मतः भी होती है, कोई दुर्घटना भी अंग भंग का कारण बन सकती है और कभी कभी समाज विरोधी तत्व भी बच्चों को विकलांग बना देते है । अज्ञानता, अंधविश्वास, तथा गरीबी भी अपंगता का कारण है। स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा या ठीक-ठीक उपचार करने की असमर्थता दिव्यांग में वृद्धि करते हैं। दिव्यांग को समान अवसर, सुरक्षा और समता दिलावाने के लिए एक कानून बनाया। 07 फरवरी 1996 को अधिसूचित किया गया । इस अधिकनियम का उददेश्य विकलांग व्यक्तियों को सुविधाएं, सेवाएं प्रदान करने के लिए केन्द्रीय और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों का दायित्व निर्धारण करना है। साथ ही उक्त दिनांक 03.12.2022 को ए.डी.आर. भवन टीकमगढ़ में अधिवक्ता दिवस मनाया गया उक्त कार्यक्रम में श्री विनोद कुमार पाटीदार ने उपस्थित अधिवक्तागण एवं सामान्य जन को अधिवक्ता दिवस के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के जन्म दिवस पर भारत भर में अधिवक्ता दिवस होता है। डाॅ. श्री राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति के साथ संविधान समिति के अध्यक्ष भी थें इन सबके पहले वह वह वकील रहे हैं। वकालत विश्व भर में अत्यंत सम्मानीय और गरिमामय पेशा है। भारत में भी वकालत गरिमामय और सत्कार के पेशे के तौर पर हर दौर में बना रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों ने जमकर लोहा लिया है। उक्त कार्यक्रमों में बृृजेन्द्र सिंह भदौरिया जिला विधिक सहायता अधिकारी, पैनल अधिवक्ता अजय नागर, अरविन्द्र जैन, राकेश नामदेव, मोहन सिंह चैरसिया, शबाना खान, सी.एम. प्रजापति, के.के. खरे राजू रैकवार, अनिल पुष्पकार, ग्रामीण स्वावलंबन समिति उपस्थित रहे।

