टीकमगढ़। साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई की 291वीं कविगोष्ठी बुंदेली पर केन्द्रित ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में आयोजित की गयी है। अध्यक्षता बुजुर्ग कवि एस.आर.‘सरल टीकमगढ़़ ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बुंदेली के कवि प्रमोद मिश्रा’ बल्देवगढ़ रहे, विषिष्ट अतिथि के रूप में जनाब हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ टीकमगढ़़ एवं रामगोपाल रैकवार टीकमगढ रहे। कवि गोष्ठी का शुभारंभ वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती बंदना के पश्चात् यह गीत सुनाया- बेटी बेटा खों एक सौ मानौ, बेटी खौ बेआ सौ जानो। बल्देवगढ़ के प्रमोद मिश्रा ने सुनाया-पशुओं से तुलना कर पशु इंसान हो गए मानव कयों हैवान हो गए
पलेरा के रविन्द्र यादव ने सुनाया- भैया कैसो जमानों आ रऔ, को समज नई पा रऔ। टीकमगढ़ से म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने‘ ग़ज़ल पढ़ी-
ऊपर से तो दिखे हैं बाबा, बदमाशन की टोली हो रई।
मेंगाई जा बढ़तरई जा रई, अर्थव्यस्था पोली हो रई।।
एस.आर सरल ने कविता पढ़ी- अपने मन की गाँठे खोलो, तनक सत्य तो बोलो। रामगोपाल रैकवार ने गीत सुनाया-पूस की उरइयाँ गुर पग रई हैं, ओरी की ओली सी उर लग रई है। बीना के आर.पी. राय ने सुनाया- निभाय लईयो मोरे समदी, आज लाज दुआरे की। डॉ. प्रीति सिंह परमार ने कविता पढ़ी-दो पल क लिए मेरे मन,उस रास्ते से गुजर जाऊँ। माँ के आँगन की मिट्टी अपने आँचल में भर लाऊँ। शायर ज़फरउल्ला खां ‘ज़फ़र’, ने ग़ज़ल कही-खुद पड़ी गीले में, सूखे में सुलाया है उसे।करे जरुरत पूरी न रुलाया है उसे। युवा कवि स्वप्निल तिवारी ने कविता पढ़ी-जब शब्द ने शब्द से पूछा शब्द से, हम कितने दर है। रामगढ़ के राम सहाय राय ने रचना पढ़ी- परिधान की पहचान की जरुरत है। परिधान में गलत कार्य हो रहे है।।
शायर अब्दुल सत्तार ने कलाम पढ़ा- बिकती सरे बाजार, अरे ना बाबा ना बाबा। तुझे कौन करेगा प्यार, अरे ना बाबा ना बाबा,ना बाबा। बल्देवगढ़ के रामअवतार प्रजापति ने भी रचना पढ़ी। कवि गोष्ठी का संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा सभी का आभार लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने माना।

