भौरा :- वन परीक्षेत्र शाहपुर अंतर्गत आने वाले तवा बफर जोन सेंचुरी के जंगल में अपने परिवार का गुजर-बसर करने के उद्देश्य से सूखी लकड़ी काट रहे आदिवासियों से वन विभाग के डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड द्वारा कार्यवाही का डर बताकर 85 हजार की अवैध उगाही करने का मामला सामने आया है। गौरतलब है कि गरीब आदिवासियों से इतनी बड़ी उगाही करने के बावजूद डिप्टी रेंजर द्वारा विभाग को गुमराह करने के उद्देश्य से इन आदिवासियों की साईकिल और कुल्हाड़ी भी जप्त कर ली गई। अब यह आदिवासी विभाग के इन भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के सामने गुहार लगा रहे हैं कि साहब कम से कम हमारी साइकिल और कुल्हाड़ी ही वापस दे दो। लेकिन डिप्टी रेंजर द्वारा उनकी साइकिल कुल्हाड़ी वापस ना करते हुए अभद्र भाषा का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि यह मामला विगत 20 सितंबर का बताया जा रहा है। इस अवैध वसूली का वीडियो वायरल होने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है। रेंजर निशांत डोशी ने मामले की उचित जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
यह है पूरा मामला
घटना को लेकर ग्राम बंजारीढाल के निवासी रामकिशन बृजलाल कासदे ने बताया कि वह अपने अन्य साथी रामचरण, सुरेश, महेश, रामसिंह, रामदास सेंचुरी के जंगल से लकड़ी काट कर ला रहे थे। जिन्हें 20 सितंबर को डिप्टी रेंजर मोकल सिंह कासदे, बीट गार्ड जितेंद्र नायर, बीट गार्ड पवन उइके ने हम 6 लोगों को लकड़ी के साथ पकड़कर साइकिल एवं कुल्हाड़ी जप्त की और केस बनाने की धमकी देकर 90 हजार की मांग की। 6 लोगों ने केस नहीं बनाने के एवज में दूसरे दिन 60 हजार रुपए नगद जितेंद्र एवं डिप्टी कासदे को दिए। 3 दिन बाद फिर 25 हजार नगद दिए। डिप्टी ने साइकिल एवं कुल्हाड़ी को जप्त कर कहा कि तुम्हारे ऊपर केस नहीं बनाऊंगा। रामकिशन ने बताया कि वह लगातार साइकिल और कुल्हाड़ी के लिए डिप्टी रेंजर से गुहार लगा रहे थे लेकिन उन्होंने साइकिल और गाड़ी देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि साइकिल नहीं होने से उन्हें मजदूरी पर जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। विभाग के अधिकारी आए दिन आदिवासियों को वन अपराध के नाम पर डरा धमका कर उन से अवैध वसूली करते हैं।
— वन अपराध के नाम पर उगाही का खेल–
गौरतलब है कि किसी वन-उपज के संबंध में वन-अपराध किया गया है, तो अपराध को करने में उपयोग किए जाने वाले उपकरण ज़ब्त कर विभागीय कार्यवाही की जाती है लेकिन आए दिन देखने में आता है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी वन अपराधों का डर बता कर भोले भाले आदिवासी से अवैध मांग करते हैं।
