टीकमगढ़ । 24 दिसंबर 2022 को टीकमगढ मे अमरशहीद नारायण दास खरे की मूर्ति पर अरुणोदय सिंह परमार एवं पवन घुवारा ने माल्यार्पण कर नमन किया साथ विज्ञप्ति मे बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा का संदेश देश की साझी विरासत को संजो रहा है।
लगभग 1800 किलोमीटर से अधिक पदयात्रा कर के जब मैं इंदौर के करीब था तब मुझे जानकारी मिली की बुंदेलखंड मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में देवपुर बक्सवाहा गांव के किसान दयाराम अहिरवार का देहांत खाद के लिए लाइन में लगे लगे हो गया। 26 नवंबर को राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की और उन्हें इस दुखद घटना की जानकारी दी एवं बुंदेलखंड में किसानों की दुर्दशा, बेरोजगारी एवं पलायन जैसे बुंदेलखंड के बड़े मुद्दो पर चर्चा की और इस बात का निर्णय किया की में यहां से छतरपुर जाऊंगा और स्वर्गीय दयाराम अहिरवार के खेत की मिट्टी के साथ साथ पूरे बुंदेलखंड में जिन जिन किसानों ने ऋण अथवा किसी भी समस्या के चलते आत्महत्या की है उनमें से कुछ के खेतों की मिट्टी को में यात्रा में लेकर आऊंगा। पत्रकार वार्ता मेअरुणोदय सिंह परमार राष्ट्रीय प्रवक्ता, युवा कांग्रेस के साथ प्रदेश प्रतिनिधि पवनघुवारा भूमिपुत्र जिन्होंने बुन्देलखण्ड बिशेष पैकेज पर सघर्ष किया कि उपस्थित रही गोरतलब है हम बुंदेलखंड का दर्द अभियान बुंदेलखंड के हर जिले में चला रहे है जिसके तहत हर जिले से मृत किसान के खेत की मिट्टी को लेकर प्रेस को भी संबोधित किया जा रहा है और सभी जिलों की मिट्टी को जनवरी माह में यात्रा में भी ले जाया जाएगा।बुंदेलखंड में लंबे अरसे से भाजपा का शासन रहा है जिसकी जन विरोधी नीतियों ने बुंदेलखंड के किसानों,युवाओं का बुरा हाल कर दिया है।हम बुंदेलखंड का दर्द अभियान के माध्यम से बुंदेलखंड की पीड़ा को यात्रा में ले जाएंगे ताकि बुंदेलखंड की समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर रखा जा सके और मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की किसान विरोधी युवा विरोधी भाजपा सरकार का असली चेहरा देश के सामने आए।भारत जोड़ो यात्रा जो दर्द से दर्द का रिश्ता जोड़ रही है। मैं अपने बुंदेलखंड के दर्द को लेने आया हूं और बुंदेलखंड के इस दर्द को कश्मीर तक लेकर जाऊंगा ताकि बुंदेलखंड के दर्द को भी भारत के दर्द से जोड़ा जा सके। आज देश का भावी इतिहास भारत जोड़ो यात्रा के रूप में सड़को पर चल रहा है। यह यात्रा देश की यात्रा है जो देश को जोड़ने के लिए और देश के दुख दर्द को सुनने और समझने के लिए निकाली जा रही है। यह यात्रा इस देश के हितों को लिए एक नदी के रूप में बही जा रही है।हमारा बुंदेलखंड भी लंबे समय से दर्द से झुलस रहा है. मैं चाहता हूं की इस दर्द को कुछ बूंदों के रूप में इस विशाल नदी से मिला दिया जाए ताकि बुंदेलखंड के भावी इतिहास में बुंदेलखंड की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयत्न के रूप में इस ऐतिहासिक यात्रा को याद रखा जाए। टीकमगढ़ मे देव आस्था पुस्तकालय पहुंच कर देखे जाने बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज पर सघर्षरत पवनघुवारा के पास उपलब्ध दस्तावेजों को ।

