
प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम/ युगप्रवर्तक, युगपुरुष, राष्ट्र संत स्वामी विवेकानंद की 160वीं जयंती एवं युवा दिवस के उपलक्ष्य में नर्मदा आह्वान सेवा समिति एवं जे.एन.सी.टी. कॉलेज रीवा के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ मीसाबंदी एवं समाजसेवी सुभाष श्रीवास्तव रहे। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जे. एन. सी. टी. कॉलेज के प्राचार्य मिहिर पांडेय ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नर्मदा आह्वान सेवा समिति के सचिव केप्टिन किशोर करैया उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन युवा कवि एवं समाजसेवी सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने किया। युवा दिवस पर आयोजित इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए जिन युवा कवियों ने अपने काव्य पाठ से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की उनमें प्रमुख रूप से अभिनय सम्राट कानपुर उ.प्र. , वाह भाई वाह फेम प्रियंका मिश्रा विजयराघवगढ़, तरूण अभ्यास नरसिंहपुर, मनीष गोस्वामी राजगढ़, जय कुमार सांवरा छिंदवाड़ा, आशीष चौहान रायसेन, रीवा से वाह भाई वाह फेम क्रांति पांडेय, डॉ आरती तिवारी एवं साकेत श्रीवास्तव शामिल हुए।
सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरुआत युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं उनकी प्रतिमा के सक्षम दीप प्रज्ज्वलन से हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम के अतिथियों एवं कवियों का सम्मान जे.एन.सी.टी. कॉलेज के मेकेनिकल डिपार्टमेंट के एच.ओ.डी. अमित श्रीवास्तव, सिविल डिपार्टमेंट के एच.ओ.डी. हर्ष गुप्ता, एग्जाम सुप्रिटेंडेंट दीपक पांडेय, डीन एकेडमिक अनुभव पांडेय, कम्पूटर साइंस डिपार्टमेंट की मनोरमा सिंह एवं वीणा मिश्रा ने किया। तदुपरांत युवा दिवस के उपलक्ष्य में सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर अभ्युदय उपकार फाउंडेशन की अध्यक्ष अनामिका शुक्ला एवं युवा एकता कल्याण संघ के अध्यक्ष राज राखन पटेल को शॉल श्रीफल, गिफ़्ट एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन की शुरुआत युवा कवयित्री क्रांति पांडेय ने माँ बागेश्वरी की वंदना से किया! तत्पश्चात नारी शक्ति पर केंद्रित अपनी ये पंक्तियाँ पढ़ी-
जो पीकर आँंसुओं को भी, स्वयं हीं मुस्कुराती हैं!
करें बलिदान इच्छा सब, न जाने सुख क्या पाती हैं!
हर एक चौखट की मर्यादा, है जिनके अपने हाथों में,
वो रणचंडी भवानी हीं, यहां नारी कहाती हैं!
इसके बाद राजगढ़ से आए युवा कवि मनीष गोस्वामी ने अपने छंदो से कवि सम्मेलन को सधी शुरुआत दी और अपनी इन पंक्तियों से स्वामी विवेकानंद को नमन किया!
वही भाषा वही भूषा वही स्वर छंद आ जाए!
यदि हम एक हो जाए तो फिर आनंद आ जाए!
हमारे धर्म का डंका बजेगा सारी दुनिया में,
धरा पर लौट के जो फिर विवेकानंद आ जाए!
विजयराघवगढ़ से आई कवयित्री प्रियंका मिश्रा ने अपने गीतों और दोहों से उपस्थित श्रोताओं को तालियाँ बजाने पर विवश कर दिया! स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित उनने ये छंद पढ़ा-
धन्य तुम्हारी विद्वता, संत विवेकानंद!
मान बढ़ाया विश्व में, बरसाया आनंद!
बरसाया आंनद, निरोगी जीवन रखना!
सिखलाया था योग,धर्म की रक्षा करना!
धीर वीर गम्भीर, ज्ञान के तुम अधिकारी!
सिद्धि साधना कीर्ति, जगत में धन्य तुम्हारी!
कानपुर से आए युवा गीतकार अभिनय सम्राट ने विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएँ पढ़ी! जिसकी एक बानगी-
तेरे आंचल में सोने लगा मेरा मन!
तेरी मिट्टी पे खोने लगा मेरा तन!
हम कफन ओढ़ कर जा रहे इसलिये,
सो सके चैन से मेरा प्यारा वतन!
कवियत्री डॉ. आरती तिवारी ने युवा दिवस पर अपनी ये पंक्तियाँ युवाओं को समर्पित की-
युवा चाहे तो धरती से गगन तक पुल बना डाले!
युवा चाहे तो सद इच्छाओं का संकुल बना डाले!
धरा की ऊर्जा सारी युवाओं में ही बसती है ,
युवा चाहे तो सूनी घाटियाँ गोकुल बना डाले!
युवा गीतकार साकेत श्रीवास्तव ने विंध्य का गुणगान अपनी इन पंक्तियों में किया-
विंध्य का गौरव शेर सुनाना सबके बस की बात नही!
रणमत जैसा वीर भुलाना सबके बस की बात नही!
मैहर में जो बैठी है माँ, शारदे जिसको कहते है,
उसकी दया का कर्ज चुकाना सबके बस की बात नही!
छिंदवाड़ा से पधारे कवि जय कुमार सांवरा ने राष्ट्र प्रेम से लबरेज अपनी ये पंक्तियाँ पढ़ी-
जिनके खून में है हर वला कुर्बान कर खाना!
अपने सर को भी मां भारती को दान कर जाना!
लगे जब आग सीने में वतन के वास्ते जिनको,
तिरंगा हाथ में लेकर निछावर जान कर जाना!
नरसिंहपुर से युवा हस्ताक्षर तरूण अभ्यास ने अपने मनोभाव अपनी इन चार पंक्तियों में व्यक्त किये-
तीन को भी चार करना सीखिए!
मुश्किलों पे वार करना सीखिए!
जीतना है ज़िंदगी की जंग तो,
हार को स्वीकार करना सीखिए!
रायसेन से आए युवा कवि आशीष चौहान ने अपनी ये पंक्तियाँ पढ़ कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की-
जो देता ज्ञान गीता का करो उस सारथी की जय!
वतन पर जां निसां कर दे उसी परमार्थी की जय!
दिया जिसने हमें भोजन, दिया घर द्वार रहने को!
उठाओ हाथ अंबर में करो मां भारती की जय!
संचालन कर रहे युवा कवि सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने स्वामी विवेकानंद को ये पंक्तियाँ समर्पित की-
हो गए अमर तुम मर के भी याद रहोगे
जब तक जहां रहेगा तुम आबाद रहोगे
उन्तालिस वर्ष में विदा होने वाले जहां से
तुम जिंदा थे जिंदा हो जिंदाबाद रहोगे
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं मीसाबंदी सुभाष श्रीवास्तव ने कहा कि- “स्वामी विवेकानंद का सपना था कि देश की युवा पीढ़ी की दशा और दिशा समुचित हो! आज एक तरफ़ जब युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ रही है तब दूसरी ओर देश के इन युवा कवियों ने जो साहित्य की सेवा का व्रत लिया है वो अपने आप में प्रशंसनीय एवं सराहनीय है! अगर इन कलमकारों की तरह सारे युवा देश और समाज के बारे में सोचे तो निःसन्देह स्वामी विवेकानंद के सपनों का हिंदुस्तान बनाया जा सकता है”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जे.एन.सी.टी. कॉलेज के प्राचार्य मिहिर पांडेय ने कहा कि- “हमारा कॉलेज सदैव ही साहित्यिक और सामाजिक कार्यक्रमों में अग्रणी रूप से अपना योगदान बढ़ चढ़ कर देता रहा है! हमारे चेयरमैन डॉ एस.एस. तिवारी स्वयं कृष्णा कॉलेज में हर साल अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन करते है और साहित्यिक यज्ञ में अपनी भी आहुति देने का कार्य करते है! वास्तव में युवा दिवस पर हमारे कॉलेज में ऐतिहासिक कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसके लिए मैं देश भर से आए कवियों को हार्दिक साधुवाद देता हूँ”।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नर्मदा आह्वान सेवा समिति के सचिव कैप्टन किशोर करैया ने कहा कि- “हमारी समिति का उद्देश्य सदैव ही युवा कवियों को मंच प्रदान करना, उन्हें सम्मानित करना और उनका हौंसला आफजाई करना रहा है! इसी लिए अखिल भारतीय कवि समागम, विवेकानंद जयंती पर अखिल भारतीय युवा कवि सम्मेलन और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अखिल भारतीय कवियत्री सम्मेलन का आयोजन संस्था के तत्वावधान में किया जाता है! इसी क्रम में रीवा में आयोजित ये कार्यक्रम अद्वितीय और अब तक का सबसे सफल आयोजन रहा”।
कवि सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार मुकुंद मिश्रा, कवि सत्येंद्र शुक्ला सजग, ज्योत्सना श्रीवास्तव, हेमलता दाहिया, अर्पित पटेल, साक्षी श्रीवास्तव, सुखेन्द्र पटेल, दीपक मिश्रा सहित महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं एवं सम्मानित स्टाफ गण उपस्थित रहे!

