प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम / प्रतिभा ही आगे चलकर व्यक्ति की पहचान कराती है, ऐसी ही प्रतिभा की धनी शहर की रचनाकार श्रीमती रेखा रत्नानी ने हमें मकर सक्रांति पर लिखी अपनी एक रचना भेजी हैं, जिसे हम आप तक प्रस्तुत कर रहे हैं। बता दें श्रीमती रेखा रतनानी ने अभी हाल में ही अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य सम्मेलन में भी प्रतिभागी बनी और अपनी रचनाएं पेश की।
*मकर संक्रांति*
इस पावन पर्व का हृदय मन से सत्कार करें, पवित्र और निर्मल मन से इस त्यौहार का।
हृदय और मस्तिष्क से सम्मान करें ।
शिशिर ऋतु के आरंभ का है यह दिन,
दिल मे उत्सव का रंग भर जाता है।
खुशियां और सुकून से जिंदगी में,
नवीनतम रंग बिरंगी भाव जग जाता है।
तिल, गुड़, मूंग, खिचड़ी का मन से सेवन, सर्वोत्तम और उत्कृष्ट जीवन विचार है।
शुभ मुहूर्त को जनजन तक सुखद,
एहसास दिलाने का उन्नत त्योहार है।
सूर्य का यह उत्तरायण में प्रवेश,
एक सफर है उत्साह का।
घर घर में शुभारंभ करने का यह एक
सबसे पावन और अनमोल त्यौहार है।
सूर्य के उत्तरायण का अपूर्व ऊष्मा व उजास संग प्रकाश का संचरण एक व्यवहार है।
सूर्य का धनु राशि का भ्रमण पूर्ण,
होने का संपूर्ण प्रमाण व ताल है।
मकर राशि में प्रवेश करने यह,
मकर संक्रांति एक संक्रमण व ताल है।
रचयिता – रेखा रतनानी, नर्मदापुरम, (एहसास की कलम RR महादेव)

