प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम /ताराअहाता में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की कथा में मानस सुमन पंडित सद्भाव तिवारी ने कथा में बताया कि वास्तव में उच्च कोटि का आनंद परमात्मा के चरणों में ही प्राप्त हो सकता है। परमात्मा रक्षा करें तो जीव समस्त कष्टों से सहज बड़ी हो सकता है, भगवान जिसकी रक्षा करें उसका कोई अंत नहीं कर सकता। गजेंद्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए व्यास जी ने बताया कि वास्तव में हमारा सहारा सांसारिक लोग नहीं एक ना एक दिन सभी साथ छोड़ते हैं। सच्चा साथ तो सिर्फ ठाकुर जी ही निभा सकते हैं।
भगवान भक्तों के प्रेम के अधीन है समुद्र मंथन का वर्णन करते हुए बताया कि वास्तव में जब अपमान रूपी जहर को पीकर ही जीवन लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। भगवान श्री राम नाम को जपते हैं तो राम नाम के प्रभाव से विष पीने के पश्चात भी विश्राम में रहते हैं। राम नाम की इतनी महिमा है कि स्वयं विष्णु और ब्रह्मा भी इन राम नाम की महिमा का बखान नहीं कर सकती अमरीश जी का वर्णन करते हुए बताया कि राजा धर्म के होना चाहिए वे एकादशी का व्रत निष्ठा से धारण करते थे जिसके परिणामस्वरूप भगवान के निकट थे नाम निष्ठा एकादशी निष्ठा तुलसी निष्ठा और तिलक निष्ठा हमें भगवान के समीप पहुंच आती है कथा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जी के चरित्र को समझने के लिए राम जी के चरित्र को श्रवण कर चरित्र का चश्मा पहना अत्यंत आवश्यक है।

