प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम / तार अहाता में चल रही संगीतमय भागवत कथा के पंचम दिवस बाल व्यास सद्भाव तिवारी ने बताया कि जो सभी को आनंद दे वो नंद है और जो सभी को यश दे वह यशोदा है। इसीलिए इनके यहां साक्षात ब्रह्म मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं, वह परमात्मा जो पूरे जगत का स्वामी है। जगत जिन के अधीन है प्रेम के बस वही परमात्मा समस्त भक्तों के अधीन हो जाते हैं। पूरा संसार भगवान से भयभीत होता है, किंतु वही भगवान यशोदा मैया से प्रेम के बस भयभीत होते हैं।
ग्वाल वालों के साथ क्रीड़ा करते हैं और सदैव प्रसन्न रहने की अपनी लीलाओं के माध्यम से शिक्षा देते हैं। कृष्ण शब्द का अर्थ होता है जो अपने नाम अपने रूप अपने लीला और धन से भक्त जनों को आकर्षित करें वह कृष्ण है। व्यास जी ने बताया कि रामकृष्ण दोनों एक हैं दोनों में कोई भेद नहीं बस राम जी के नयन गंभीर हैं और कृष्ण जी के चपल हैं। भगवान ने पूतना का वध कर अविद्या को नष्ट किया। ऑल तृणावर्त का वध कर काम वासनाओं के वेग को नष्ट किया। अघासुर का वध कर पाप को नष्ट किया आगे में व्यास जी ने गोवर्धन लीला का वर्णन किया कि इंद्र के मान का मर्दन करते हुए भगवान ने अपनी कनिष्ठका उंगली पर गोवर्धन को धारण किया। नगर पालिका अध्यक्ष नीतू महेंद्र यादव, सेमिरिटर्नस स्कूल के डायरेक्टर आशुतोष शर्मा, पार्षद नैना सोनी, डॉक्टर श्रद्धा गुप्ता ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

