प्रीती चौहान /नर्मदापुरम / मौनी अमावस्या का आरंभ 21 जनवरी , शनिवार को सुबह 06 बजकर 17 मिनट पर होगा, जो कि 22 जनवरी को सुबह 02 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार मौनी अमावस्या 21 जनवरी को मनाई जाएगी। माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या कहा जाता है।इस दिन मौन रहकर दान व स्नान करने का विशेष महत्सव है। मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने पर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में बताया गया है कि मौनी अमावस्या के दिन जप, तप, दान और पवित्र नदियों में स्नान करने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है। मौनी अमावस्या की तिथि पर मौन व्रत रखकर ईश्वर का ध्यान करके जप, तप और दान करके मुनि पद की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम भी जाना जाता है, इस दिन मौन रहकर जप-तप व दान किया जाएगा। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को माघी या मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, शनिवार को अमावस्या तिथि पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाएगा। साथ ही इस दिन प्रयागराज में शाही स्नान भी किया जाएगा। मौनी अमावस्या की तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान, जप-तप, दान-पुण्य के कार्य करने का विशेष महत्व है। इस अमावस्या तिथि को साधु-संतों की तरह चुप रहकर और मन को शांत करके ध्यान करना बहुत उत्तम माना जाता है। पद्म पुराण में बताया गया है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और दान से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और विशेष धर्म लाभ प्राप्त होता है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान नदी, सरोवर या पवित्र कुंड में स्नान करना चाहिए। इस दिन व्रत रखकर जहां तक संभव हो मौन रहना चाहिए। अनाज, वस्त्र, तिल, आंवला, कंबल, पलंग, घी और गौ शाला में गाय के लिए भोजन का दान करें। यदि आप अमावस्या के दिन गौ दान, स्वर्ण दान या भूमि का भी बहुत महत्व है।

