प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम्/ रविशंकर नगर आदमगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस पं. राजेश शास्त्री ने अपनी अमृतमयी वाणी में कहा कि भगवान के साथ सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है। सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती है। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि है। इससे पूर्व पं. शास्त्री ने अपने मुखारबिंद से भगवान की अनेक लीलाओं का वर्णन किया। जिसमें कंस वध, उद्धव संदेश और रुकमणी विवाह शामिल है। संगीतमय श्रीमद भागवत कथा श्रद्धालु जमकर थिरके। पं. शास्त्री ने कथा को विस्तार देते हुए श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की अमृत वर्षा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बीच बीच में सुंदर-सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई।
मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गई। कहने लगी हे कन्हैया जब आपको हमें छोड़कर ही जाना था तो हम से प्रेम क्यों किया। गोपी उद्धव संवाद, श्री कृष्ण एवं रुकमणी विवाह उत्सव पर मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई। भगवान श्री कृष्ण रुकमणी जी के समस्त श्रद्धालु भक्तजनों ने शादी का आंनद लिया। बंजारीमाई आयोजन समिति के सदस्य दीपक यादव, बद्रीप्रसाद कौरव, ब्रजेंद्र मालवीय, ब्रजेश विश्वकर्मा, लक्ष्मण किशोर त्रिपाठी द्वारा भक्तों से आव्हान किया गया अधिक से अधिक संख्या में कथा सुनने अवश्य आएं।

