प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम/रविशंकर नगर आदमगढ़ में संगीतमयी श्रीमद् भगवत कथा के सातवें विश्राम के दिन श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन किया गया। वृंदावन धाम से आए कथा वाचक पं. राजेश शास्त्री ने कथा के दौरान श्रीकृष्ण एवं सुदामा के मित्रता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। योगेश्वर श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा जी की आवभगत में इतने विभोर हो गए के द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों से सुदामा जी का हाल चाल पूछने लगे। पं. शास्त्री ने बताया कि इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में धन दौलत आड़े नहीं आती। आचार्य ने सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र की कथा सुनकर एवं कृष्ण एवं सुदामा के मिलन की झांकी का दृष्य देख पण्डाल में मौजूद समस्त भक्तगण भाव विभोर हो गए। अद्भुत झांकी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और एक स्वर में राधे- कृष्ण के जयकारों से पंडाल गुंजायमान हो उठा। इससे पूर्व भगवान द्वारकाधीश के 16108 विवाह का वर्णन किया। परीक्षित सुधीर जलखरे और उनके परिजन ने व्यासगादी और आचार्य का पूजन किया। बंजारीमाई समिति के सदस्यों दीपक यादव, बद्रीप्रसाद कौरव ब्रजेंद्र मालवीय, श्री जोशी ने बताया कि 16 जनवरी 2024 को यहां श्रीराम कथा का आयोजन होगा। जिसमें परीक्षित के रूप में ब्रजेश विश्वकर्मा उनके परिजन शामिल होंगे।

