प्रदीप गुप्ता / नर्मदापुरम / बसन्त पंचमी पर भारत की ताज नगरी आगरा (उ. प्र.) में राधास्वामी सन्तमत मुख्यालय स्वामीबाग के प्रशासनिक भवन में सेक्रेटरी एस. एस. भट्टाचार्य, सेन्ट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव कौंसिल, वाईस प्रेसीडेंट हर्षदभाई मनुभाई पटेल ( मुम्बई), ट्रस्ट सेक्रेटरी गुरूचरण दास, श्रीमती अदिति मुंगलवार (नागपुर), प्रवीणभाई मथुरभाई जोशी , डी. के. मित्तल ने नर्मदा की माटी ग्रैंडमास्टर डॉ.अजय निगम का सम्मान करते हुए बधाई दी। डबल वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर ग्लोबल फेम अवार्ड विनर डॉ. निगम को अजंता एलोरा इंटरनेशनल आर्ट गैलरी औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के डायरेक्टर द्वारा भारतीय कलारत्न अचीवर्स अवार्ड एवं मुम्बई में कौंसिल फार ब्रांड बिस़नेस प्रमोशंस एंड रिसर्च द्वारा इंटरनेशनल अवार्ड फार एजुकेशनल एक्सीलेंस -2022 से सम्मानित किया गया । यह सम्मान प्रथम वर्ल्ड कप क्रिकेट-1983 विजेता एवं भारतीय क्रिकेट टीम के कोच मदनलाल तथा राज्यपाल डॉ. किरण बेदी द्वारा प्राप्त हुआ । सन् 1861 में बसंत पंचमी के दिन राधास्वामी प्रमुख स्वामीजी महाराज ने उनके परमशिष्य प्रथम भारतीय पोस्टमास्टर जनरल राय बहादुर सालिगराम माथुर (हुज़ूर महाराज) की विशेष प्रार्थना स्वीकार करते हुए राधास्वामी सन्तमत के दरवाजे प्राणीमात्र के लिए खोल दिए थे । जन्म – मरण के कष्ट से हमेशा के लिए मुक्ति एवं परमपिता के निज धुरधाम तक वापस पहुँचने का सुरत शब्द योग जिसे 6 वर्ष के बच्चे से लेकर वृद्ध से वृद्ध मनुष्य आसानी से कर सकता है बताना शुरू किया था। जिसे समाज के ठेकेदारों ने अपनी दुकान चलाने के लिए एवं पारिवारिक जागीर बनाने के लिए पर्दा डाल रखा था । हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, जैनी सभी उनके अनुयायी थे ।

