इटारसी : नगर पालिका इटारसी द्वारा शहर के विद्यालयों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन वर्षों से करा रहा है । इन कार्यक्रमों में सामूहिक नृत्य एवं नृत्य नाटिका की प्रस्तुति 26 जनवरी मिनी गांधी स्टेडियम में प्रदर्शन देने हेतु की जाती है । इसके लिए प्रारंभिक दौर में कार्यक्रम से कुछ दिनों पहले चयन हेतु ऑडिशन कराया जाता हैं । आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के ऑडिशन में निर्णायक मंडल की भूमिका कैसी होगी स्पष्ट नहीं रहता हैं ।
साथ ही नृत्य कला से संबंधित तकनीकी कोरियोग्राफर के रूप में निर्णायकों की अनुपस्थिति रहती है । इन कार्यक्रमों के ऑडिशन से लेकर फाइनल प्रस्तुति चयन तक किसी भी प्रकार की नियमबद्धता नहीं दिखाई देती हैं । गौरतलब है कि इस वर्ष के नृत्यों के ऑडिशन सिलेक्शन में निर्णायक मंडल ने देश की संस्कृति धर्मों से जुड़े धार्मिक गीतों को एकतरफा दरकिनार किया । विडंबना यह रही की धार्मिक गीतों की प्रस्तुतियों को विशेष प्रस्तुति वर्ग में प्रदर्शन कराया गया किन्तु इन धार्मिक गीतों को प्रतियोगिता मैं शामिल नहीं किया गया । इन निर्णयों से यह प्रतीत होता है हिंदू देवी देवताओं की नृत्य प्रस्तुति को बाहर रखकर धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है । इससे धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कार्य होते दिखाई दिया है ।
समाजसेवी भारत सिंह ठाकुर ने कहा है कि सभी धर्मों का सम्मान होना आवश्यक है ऐसा होने पर धार्मिक स्वतंत्रता का गलत संदेश लोगों तक जाता हैं । नगर पालिका को इस हेतु ठोस कदम उठाया जाना आवश्यक है अन्यथा अनेक विद्यालय इन कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखेंगे । इस वर्ष प्राथमिक विद्यालय वर्ग में दो विजेताओं को घोषित करने से कार्यक्रम की साख पर सवालिया निशान लगा हैं । साथ ही इन कार्यक्रमों में ऐसा न लगे की फाइनल कार्यक्रमों का निर्णय चयन पहले से फर्स्ट चॉइस सिलेक्शन के आधार पर हो रहा हैं । हमेशा विजेता होने वाले विद्यालयों की पुनरावृत्ति की ओर इशारा न करें ।
इनका कहना
नगर पालिका सीएमओ, हेमेश्वरी पटेल
मुझे निर्णायकों का चयन किस आधार पर किया गया इसकी कोई जानकारी नहीं है ।
नगरपालिका अध्यक्ष, पंकज चौरे
इस वर्ष जो भी कमी रह गयी हैं उसे आगामी वर्ष के कार्यक्रम में देखा जावेगा ओर इसे मैं स्वयं देखूंगा ।


