नर्मदापुरम/ (प्रदीप गुप्ता- जिला ब्यूरो) प्रतिवर्ष लगने वाला रामजी बाबा का मेला, जिसमें दूर दूर से दुकानदार अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए मेले में अपना घर द्वार छोड़ कर आते हैं। रामजी बाबा मेला में महंगी दुकानें और जगह आवंटित करवा कर झूले लगाने वाले दुकानदार धंधापानी नहीं होने से खासे परेशान है। उनकी परेशानी की एक खास वजह मेला प्रभारी की कार्यप्रणाली भी है, जिसके चलते मेला से उनका मोह भंग हो रहा है। दरअसल मेला प्रभारी रमेश चंद्र शुक्ला पार्षदों और रसूखदारों को उनके परिवार के सदस्यों को मेले में घूमने के लिए निशुल्क पास जारी कर रहे हैं। मेला में रोजाना शाम होते ही पास लेकर बढ़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व पार्षद अपने परिचितों को लेकर झूलों का मुफ्त आनंद उठाने के लिए पहुंच जाते हैं। सैकड़ों की संख्या में पार्षदों उनके परिजन, रिश्तेदार और चहेते लोग मेला में झूले वालों पर धोस जमाकर झूला झूलने पहुंच रहे हैं। जिसका घाटा झूला वालों को उठाना पड़ रहा है। नगरपालिका अधिनियम में यह साफ और स्पष्ट लिखा है कि कोई भी पार्षद किसी भी प्रकार का लाभ स्वयं व अपने परिवार के लिए नहीं ले सकता है। और ना ही पार्षद नगरपालिका में संपत्ति क्रय, दुकान की नीलामी या ठेका स्वयं व अपने परिवार को दिला सकता है लेकिन नगरपालिका नर्मदापुरम में उल्टा हो रहा है। रामजी बाबा मेले में नियमों को दरकिनार करते हुए मेला प्रभारी ने शासन के नियमों के विपरीत मेला घूमने के लिए पार्षदों को एक पास में 5 लोग फ्री कर पास जारी कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि मेले के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है।
*महंगाई से धंधा, पहले ही मंदा*
मेले में आए दुकानदारों की हालत इतनी खराब है कि उनका इस बार धंधा पानी भी चौपट पड़ा हुआ है। और मेले में घूमने वाले लोग निशुल्क पास लेकर 20 से 25 लोगों को बदल-बदल कर मेला घूमा रहे हैं। इधर झूले वालों का कहना है कि एक तो नगरपालिका दुकान आवंटन में हजारों रुपए की रसीद कटवा रही है, भारी भरकम बिजली का बिल भी हमसे लिया जा रहा है। वहीं मेले में घूमने के लिए हमारे पास सेकड़ों लोग फ्री झूला झूलने आ जाते हैं। इससे आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना काल में रामजी बाबा मेला नहीं लगने के कारण हम लोगों का परिवार भरण पोषण करने के लिए हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। वैसे भी इस बार मेले में भीड़ कम है धंधा पानी पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में नगरपालिका का यह रवैया सही नही है। ऐसे अधिकारी पर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती यह समझ से परे है। शादी की 2 साल से कोरोना काल की वजह से मेला नहीं लग पाया है। और इस बार लगा है तो इस फ्री पास पद्धति ने उनका धंधा भी चौपट कर रखा है। कुछ दुकानदार और झूले वालों का कहना है कि अगर यही आलम चलता रहा तो हम अब आगे मेले में कैसे आ पाएंगे।

