सोहागपुर / प्रदीप गुप्ता /करनपुर सोहागपुर में अनंत श्री विभूषित पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के पावन सान्निध्य एवं पूज्य आचार्य सोमेश परसाई के आचार्यत्व में आयोजित श्री सवाकरोड शिवलिंग निर्माण में आज चतुर्थ दिवस के उपलक्ष्य में शंकराचार्य ने शिवभक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सारी इंद्रियों का संचालन करने वाला मन ही है, मन सारी क्रियाएँ संचालित करता है, आंखों का देखना कानों का सुनना भी मन की आज्ञा के बिना संभव नही । महाराज ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब मन नही करता तब बातें सुन कर भी सुनाई नही देती । मन बहुत चंचल है और इंद्रियां बहिर्मुख है, कामनाएं इतनी प्रबल हैं की परमात्मा यदि आयु हजार वर्ष भी कर दे तो भी पूर्ण न हो पाए । शंकराचार्य ने रुद्रसूक्त की व्याख्या करते हुए कहा कि वेद जागृत अवस्था मे शिव संकल्पमय होने की कामना करते हैं। किंतु मनुष्य प्रातः उठते ही प्रपंच में फस जाता है, इसके पश्चात महाराज ने याज्ञवल्क्य ऋषि का दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि मोह बंधन का कारक है, मनुष्य इतना स्वार्थी होता है कि सबसे अधिक प्रेम स्वयं से करता है, स्वार्थ के अनुसार संबंध बना लेता है। सभी संबंध स्वार्थ के कारण ही बनते हैं और यही संबंध मोक्ष मार्ग के सबसे बड़े खूंटे हैं । ये ही दुख और कष्ट के कारक होते हैं। मनुष्य के दुख का सबसे बड़ा कारण उसकी अज्ञानता है ।
मनुष्य सुख प्राप्ति के लिए अनेक प्रयास करता है, किंतु सुख प्राप्त नही होता। क्योंकि जिसे वो सुख समझता है वह क्षणिक सुख होता है, वह आनंद नही होता । भगवान की शरणागति ही वास्तविक सुख है जो कि परमानंद है । द्वितीय सत्र में कार्यक्रम के आचार्य सोमेश परसाई ने शिव भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि शिव का एक अर्थ यह भी है कि सहज हो जाना । शिव वो हैं जिनको न सम्मान का मोह है ना अपमान का भय । नित्य परमार्थ करने वाले ऐसे भगवान शिव हैं जो कल्याण स्वरूप हैं । जब आप पूजा पर बैठें तो संगदोष से रहित हो कर बैठे। आचार्य ने कहा कि इस आयोजन के पीछे एक ही सोच है कि कलिकाल में आतताई हमारे धर्म को कमजोर करने में लगे हुए हैं धर्म तब तक कमजोर नही होगा जब तक संस्कार जीवित हैं लोग संस्कारित हो यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। आचार्य ने किसानों के संबंध में कहा आज किसान अधिक दुखी हैं पुराने समय मे किसान अपने उपजाए अनाज में कुछ अंश गौमाता, पशु पक्षी, मंदिर , बहन, बेटियों को देता था। किंतु आज के ऑनलाइन युग मे अनाज सीधे मंडी जाता है। घर भी नही आता खाते में पैसा आता हैं और कब चला जाता पता ही नही चलता । आज सभी सुख सुविधाएं है मुलायम गद्दे हैं पर नींद नही है,भोजन है पर भूख नही है लोगो के पास धन तो बहुत है पर वो धन धर्मयुक्त नही है । आज की पीढ़ी को युवाओं को बच्चों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। उनको ये बताने की आवश्यकता है कि भगवान राम स्वयं ईश्वर थे पर प्रातः काल उठ कर माता पिता गुरु के चरणों की वंदना किया करते थे । आज बच्चो को गौ ग्रास देना, मंत्र जाप करना सिखाने की आवश्यकता है । यदि आज बच्चे संस्कारित हो गए तो संस्कृति सुरक्षित रहेगी और संस्कृति सुरक्षित रही तभी हमारे गाँव हमारा देश सुरक्षित रहेगा । कार्यक्रम के प्रारम्भ में वैदिक ब्राह्मणों ने स्वस्तिवाचन किया तत्पश्चात मुख्य यजमान हरगोविंद पुरविया व राजेश पुरविया ने गणेश गौरी पूजन मंडलादि का पूजन किया । कार्यक्रम में नित्य भारी संख्या में शिवभक्त पधार कर रुद्रियों का निर्माण कर रहे हैं। भगवान का सभी शिवभक्तों ने दूध दही घी इत्र आदि द्रव्यों से अभिषेक किया।भगवान की सुंदर स्तुतियों का संगीतमय गान किया गया ।
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