नर्मदापुरम /प्रदीप गुप्ता /शिवार्चन समिति के तत्वाधान व पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई के सान्निध्य में विगत 35वर्षों से आयोजित महा शिवरात्रि महोत्सव में 36वे वर्ष में पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई ने शिवभक्तों को संबोधित करते हुए कहा भगवान शिव संसार को जोड़ते हैं। भगवान शिव का एक मात्र दरबार है जहां सर्प है तो शिकारी मयूर भी है बैल है तो भगवती का वाहन शेर भी है। किंतु सभी शिव परिवार के साथ प्रेमपूर्वक है मानो संसार को संदेश दे रहे हैं कि शिव राग द्वेष को समाप्त कर मोक्ष को देने वाले हैं । इसके पश्चात आचार्य ने कहा कि तीन रात्रियों का महत्त्व है जिनमे से शिवरात्रि प्रमुख है । आज शिवलिंग का प्राकट्य भी हुआ है । आज भगवान शिव की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है । भगवान् शिव का नाम कल्याण स्वरुप है। इनके पूजा मात्र से त्रिविध तापों का नाश संभव है । आज के दिन अभिषेक का सर्वाधिक महत्त्व है । इसके पश्चात भगवान् शिव के रुद्राभिषेक हुआ जिसमे दूध, दही, घी, शहद सहित नाना प्रकार के द्रव्यों से भगवान् शिव का अभिषेक हुआ।भगवान् का रूद्र सूक्त व शिवमहिम्न से संगीतमय अभिषेक किया गया ।विल्वपत्र महत्त्व व महाशिवरात्रि की कथा के बारे में प्रकाश डालते हुए गुरु देव ने कहा आज के दिन भगवान् शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने का सर्वाधिक महत्त्व है । सृष्टि भी त्रिगुणमयी है और बिल्वपत्र में तीन ही पत्तिया है। तीन पत्ती वाली बिल्वपत्र का ही सर्वाधिक महत्त्व है । एक बिल्वपत्र तीन जन्मों के पाप समाप्त करती है।

