हरदा / प्रदीप गुप्ता / वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन महाकाल लोक की तर्ज पर केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से हरदा जिले के हरदा नगर में स्थित गुप्तेश्वर महादेव और खिरकिया नगर के पास चारूवा स्थित प्रसिद्ध स्वयंभू गुप्तेश्वर महादेव परिसर में भी गुप्तेश्वर महादेव लोक बनाया जाएगा। मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एवं किसान नेता कमल पटेल ने शनिवार को महाशिवरात्रि पर्व पर चारूवा स्थित स्वयंभू गुप्तेश्वर महादेव मेले का उद्घाटन करते हुए उपरोक्त घोषणा की। उन्होंने कहा कि हरदा जिले के दोनों स्थानों पर गुप्तेश्वर महादेव लोक का निर्माण शीघ्र चालू करवाया जाएगा और जिन इंजीनियरों ने वाराणसी कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक बनाया है। उनकी सेवाएं गुप्तेश्वर महादेव कॉरिडोर बनाने में ली जाएंगी। कृषि मंत्री पटेल ने कहा कि दोनों जगहों को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाया जाएगा और जो सुविधाएं वाराणसी और उज्जैन में पर्यटकों को मिल रही है। वैसी ही सुविधाएं गुप्तेश्वर महादेव लोक मे भी मिलेगी।
*हरदा जिले के चारूवा स्वयंभू गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के बारे में*
हरदा जिले के खिरकिया नगर से करीब 8 किमी दूर स्थित प्राचीन गुप्तेश्वर मंदिर नगर, क्षैत्र, जिला व प्रदेश में प्रसिद्धी प्राप्त हैं। जानकारी के अनुसार स्वर्णकार समाज के भक्त को भगवान भोले ने साक्षात दर्शन देकर टीले के नीचे मंदिर दबे होने की बात कही। इसके बाद खुदाई करने पर उत्पन्न मंदिर से यहां महाशिवरात्रि में आस्था देखते ही बनती हैं। खुदाई में मंदिर निकलने की यह चमत्कार लगभग 250 वर्ष पहले की बात कही जाती हैं। इतिहास में चंपावती नगरी तथा वर्तमान में अब चारूवा से मात्र डेढ किमी दूर हरिपुरा में कल – कल बहती काली माचक नदी के बाणगंगा तट पर स्थित स्वयं – भू भगवान गुप्तेश्वर का टीले पर शिवलिंग हजारों लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। बदलते परिवेश में अब यहां आस्था के साथ पर्यटन स्थल भी बनता जा रहा है, जो तहसील की शान बन चुका है। वैसे शिवलिंग की स्थापना के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है, मगर मंदिर वर्षों पुराना होना इतिहास के कागजों में दर्ज है। कथाओं में ही बताया गया कि गुप्तेश्वर मंदिर गुप्त स्थान से निकलने के कारण मंदिर का नामकरण गुप्तेश्वर किया गया है।

