नर्मदापुरम / प्रदीप गुप्ता /आज जनसुनवाई में बसंत सराठिया आदिवासी किसान जो माखन नगर तहसील के ग्राम बगलोन से पहुंचा जिसने जिला कलेक्टर को कोई भी शिकायत पत्र नहीं दिया पर उसके द्वारा एक स्मरण पत्र जरूर दिया गया । जिसमें उल्लेख किया कि उसके पिताजी के स्वर्गवास के बाद आधा एकड़ की जमीन उसकी मां के नाम आना था किंतु आज तक उसकी जमीन मां के नाम ना हो सकी और मां भी इतनी वृद्ध हो गई है कि कहीं आ जा सकती नहीं है। आदिवासी किसान बसंत की उम्र लगभग 60 वर्ष है। एक वर्ष तक बसंत ने माखन नगर तहसील के चक्कर लगाए उसके बाद एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाए और विगत 1 वर्षों से वह कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। पर उसकी सुनने वाला कोई नहीं। जो जो कागज उस से मांगे गए उसने सारे कागज ला कर दिए। एक पैर से अपंग यह किसान इतना हताश हो गया कि मुंह से आवाज तक नहीं निकल पा रही थी। बसंत ने बताया कि उसने सुना है कि कलेक्टर उस गरीब की जरूर सुनेंगे। लोगों ने उसे बताया था आज उसकी जमीन का फौजी नामांतरण ना होने के कारण ना उसे प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ मिल पा रहा है, ना मुख्यमंत्री सम्मान निधि का लाभ मिल पा रहा है. ना ही बिजली के लिए कनेक्शन मिल पा रहा है. आज वह अपनी फसल बेचने के लिए कई सालों से रजिस्ट्रेशन के लिए वंचित रहा. ओने पौने दामों में अपनी फसलों को उसने बेचा। किस प्रकार से वह अपने परिवार को चलाता है एक आदिवासी किसान का दर्द फिर भी उसे आशा है कि उसके साथ न्याय होगा।

