सट्टे का काला कारोबार चरम पर: सूत्रों के हवाले से बड़े खाईबाजों के संरक्षण और लेन-देन का बड़ा खुलासा I
इटारसी। शहर और आसपास के इलाकों में अवैध सट्टे का कारोबार इन दिनों अपनी पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। शहर के प्रमुख चौराहों, गलियों और चाय-पान के टपरों से लेकर अब ऑनलाइन मोबाइल ऐप्स तक, सट्टे का जाल मकड़ी की तरह फैल गया है। जल्दी पैसा कमाने की होड़ में शहर का युवा वर्ग इस दलदल में तेजी से धंसता जा रहा है, जिससे कई हंसते-खेलते परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
सूत्रों के हवाले से बड़ा खुलासा: कौन चला रहा है सट्टे की ‘सिंडिकेट’? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शहर में चल रहे इस अवैध सट्टा नेटवर्क को सीधे तौर पर शहर के कुछ बड़े खाईबाज और सट्टा माफिया ऑपरेट कर रहे हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि इन मुख्य सरगनाओं को स्थानीय स्तर पर कुछ रसूखदारों और आपराधिक प्रवृत्ति के तत्वों का सीधा संरक्षण हासिल है। सट्टे की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा रोजाना ऑनलाइन ट्रांसफर और ‘हवाला’ के जरिए बाहर भेजा जा रहा है, जिसकी बदौलत यह काला धंधा बिना किसी खौफ के बेधड़क फल-फूल रहा है।
खुलेआम पर्चियां और ऑनलाइन सट्टा- शहर के कई क्षेत्र संवेदनशील इलाकों में धड़ल्ले से सट्टा पर्चियां लिखी जा रही हैं। वहीं व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम और फर्जी आईडी के जरिए मोबाइल पर हर दिन लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है।
युवाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी मार-सट्टे की इस काली लत के कारण शहर के छात्र, मजदूरी करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रतिदिन मेहनत की कमाई सट्टे के दांव में गंवाने के बाद लोग कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। कर्ज के दबाव में कई युवा अपराध की राह पकड़ रहे हैं।
नागरिकों की मांग: हो ठोस कार्रवाई-शहर के जागरूक नागरिकों और समाजसेवियों ने पुलिस अधीक्षक एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि सूत्रों से मिल रही जानकारियों के आधार पर इन बड़े सट्टा माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पत्रकार कुणाल पासवान
