टीकमगढ़। ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर मंगलवार को टीकमगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय सप्तऋषि अखाड़े द्वारा भव्य संत समागम एवं धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं धर्माचार्य एकत्रित हुए। धार्मिक वातावरण के बीच सप्तऋषियों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया तथा सनातन धर्म, संत परंपरा, धर्म जागरण एवं सामाजिक सेवा को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में सप्तऋषि अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मद जगद्गुरु सच्चिदानंद बालप्रभुजी महाराज ने सप्तऋषियों का विधिवत पूजन कर देश और समाज में धर्म, संस्कार, सेवा एवं सनातन संस्कृति के विस्तार का संकल्प लिया। संतों ने भी सप्तऋषि परंपरा को आगे बढ़ाने और युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया। संत समागम के दौरान सप्तऋषि अखाड़े की संत परंपरा में महत्वपूर्ण नियुक्तियां करते हुए चार संतों को विभिन्न पदों से विभूषित किया गया। गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से श्री आदेश कुमार (राघवदास जी महाराज को श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पद प्रदान किया गया। पंढरपुर, महाराष्ट्र से श्री शिवशंकर दास जी महाराज एवं साध्वी शिवनंदा जी को श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पद से अलंकृत किया गया। वहीं दत्त मंदिर, राजूरी, महाराष्ट्र से श्री गोरखनाथ जी महाराज तथा श्री भाग्योदय महाराज को मंडलेश्वर पद प्रदान किया गया।
ट्टाभिषेक के दौरान संतों ने अखाड़े की परंपरा, धर्म रक्षा, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार, गौसेवा एवं समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। संत समागम में आगामी नाशिक कुंभ मेला को लेकर भी चर्चा हुई। सप्तऋषि अखाड़े द्वारा कुंभ में संतों की सहभागिता, धार्मिक कार्यक्रमों, सेवा कार्यों, अन्न सेवा एवं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार की तैयारियों को लेकर प्रारंभिक कार्ययोजना पर विचार किया गया। अखाड़े से जुड़े संतों ने कहा कि नाशिक कुंभ में सप्तऋषि अखाड़ा अपनी संत परंपरा और सेवा भावना के साथ प्रभावी सहभागिता करेगा तथा देशभर से संतों एवं श्रद्धालुओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।संत समागम में टीकमगढ़ में निर्माणाधीन सप्तऋषि अखाड़े की प्रमुख पीठ को लेकर भी विशेष घोषणा की गई। बताया गया कि यह स्थान आने वाले समय में संतों, साधकों एवं सनातन धर्म से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा इसी अवसर पर टीकमगढ़ शहर में भविष्य में “मिनी कुंभ के आयोजन की गर्जना भी की गई। संतों ने कहा कि आने वाले समय में टीकमगढ़ को एक बड़े धार्मिक एवं संत समागम के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से संत-महात्माओं के साथ श्रद्धालु भी शामिल होंगे। कार्यक्रम में संतों ने एक स्वर में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, गौसेवा, समाज सेवा, युवा पीढ़ी में संस्कार निर्माण तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संकल्प लिया। संत समागम के दौरान श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक अनुष्ठानों एवं संतों के आशीर्वचन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। सप्तऋषि अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मद जगद्गुरु सच्चिदानंद बालप्रभुजी महाराज ने कहा कि सप्तऋषि परंपरा केवल आध्यात्मिक साधना की परंपरा नहीं, बल्कि धर्म, सेवा, संस्कार, गौ रक्षा और समाज कल्याण का मार्ग भी है। अखाड़े का उद्देश्य संत शक्ति को एकजुट करते हुए सनातन संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है। ऋषि पंचमी के अवसर पर आयोजित यह संत समागम टीकमगढ़ की धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सप्तऋषि अखाड़े के विस्तार और आगामी नाशिक कुंभ की तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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