एम्स की बहुत बड़ी भारी संख्या में छवि खराब कर रखी है हर कोई एक ही बात कहता है कि अखिल भारतीय विज्ञान संस्थान ने इलाज में समय तो लगता ही है
हर जगह लाइन एवं देरी से कार्य करना कछुए वाली चाल से कार्य किया जाता है यह कौन करवा रहा है
उनकी छवि करवाने में किसका रोल सबसे ज्यादा है इसका परीक्षण होना अभी बाकी है समय पर 60% लोग उपलब्ध रहते हैं मेडिसिन में सबसे अच्छा कार्य होता है
अच्छे डॉक्टर है महिला डॉक्टर है जिनका हमें सब लोगों को 140 करोड़ जनता को मिलकर ऐसी भगवान जैसे डॉक्टर का सम्मान करना हमारे सबके लिए गर्व की बातें हैं
गरीब गंभीर मरीज किस महिला अशिक्षित देश में 60% लोग हैं जिनको बड़ी भारी समस्या होती है एम्स में इलाज करवाने जाते हैं तो मोबाइल में बैलेंस नहीं होना मोबाइल बंद रहना कीपैड से ऑनलाइन ओपीडी के पर्चे नहीं बनवाना एम्स में 60% गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है और नहीं ओपीडी के परिचय बनवा जाते हैं बहुत मशक्कत के बाद में सिक्योरिटी गार्ड वाले इक्का दुक्का लोग सही गाइड कर देते हैं तो कुछ लोग उनका पर्चा बनवा कर देते हैं
ऑनलाइन से ग्रामीण किसान 60% ओपीडी के प्रचार नहीं बनवा पा रहा है
इस पर भारत सरकार को मैनेजमेंट को एम्स के डायरेक्टर को और यहां के कर्मचारियों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है
गंभीर मरीजों को जांच के लिए कई कई महीने इंतजार करना पड़ता है जांच की तारीख दे देते हैं और गंभीर मरीज तारीख ही भूल जाता है इतनी लंबे महीने की तारीख दे रहे हैं एम्स में कोई बदलाव सुधर्व नहीं आया है व्यवस्था बहुत गड़बड़ाई है ऐसा सूत्रों का कहना और मानना है कि जानबूझकर भीड़ न लगे और बड़ी संख्या में हम इलाज न कर सकें इसलिए व्यवस्था को सुधार नहीं रहे हैं खाली टाइम पास जैसा व्यवस्था बना रखी है गंभीर मरीजों को मौत के घाट लापरवाही से हो रही है अभी तक किसी भी वैज्ञानिक ने एम्स की लापरवाही पर अपनी पकड़ नहीं बना पाए कि आखिर देरी किसके वजह से हो रही है किस लिए हो रही है जांच एक दिन या दो दिन या तीन दिन में हो जाना चाहिए महीना चक्कर कटवा रहे हैं कोई सुनने वाला नहीं है यह शिकायत मिल रही है कर्मचारी पर किसी की लगाम नहीं है सूत्रों का मानना है कि एक तरह से तानाशाह वाला रवैया अपना रहे हैं कुछ जगह पर गर्व और प्राउड है पूरे भारत को तो मेडिसिन डिपार्टमेंट के अलावा कहीं भी ठीक से अच्छे से ट्रीटमेंट इलाज नहीं मिलता है ऐसा माना जा रहा है
उसमें भी बिलिंग काउंटर पर जानबूझकर अधिक समय लगाया जा रहा है और वहां पर लाइन लगाना पड़ता है बाहर दो घंटे वेट करना पड़ता है
अंदर प्रवेश देते हैं बिलिंग काउंटर के पास वहां पर 1 घंटे और 1 घंटे ब्लड कलेक्शन में तो ओपीडी में अलग अलग कई जगह लाइन लगवानी डॉक्टर को दिखाने में अलग वेट करना पड़ रहा है कुल मिलाकर पूरा दिन खराब हो जाता है एक मरीज को एक मजदूर यहां पर इलाज करवाने के लिए आता है फिर उसकी जांच दूसरे दिन होती है फिर दो दिन का अलग से समय मांगते हैं रिपोर्ट लेने के लिए उसके बाद आपका ट्रीटमेंट चालू होगा ऐसा जगह-जगह पर मरीज को चक्कर कटवा रहे हैं
एम्स के व्यवस्था पर अंकुश लगना चाहिए क्योंकि यह बदनामी एम्स की करवाने वाले कर्मचारी अधिकारी को अपने संज्ञान में लेकर ठीक से व्यवस्था बननी चाहिए घोर लापरवाही के वजह से लोग एम्स में जाना पसंद नहीं कर रहे हैं यहां पर सुबह से ही बड़ी भारी लाइन बाहर लगवाया जाता है जिसमें लगभग 500 से अधिक लोगों को बाहर धूप में खड़े होना पड़ता है बिगर बैठक व्यवस्था के खड़े रहकर चार से पांच घंटे बाद नंबर आता है डॉक्टर के पास पहुंचने में क्या गंभीर मरीज लाइन में लगकर खड़े होने लायक स्थिति में रहता है बिल्कुल नहीं आखिर व्यवस्था कितने बिगड़ी है
कौन बिगाड़ रहा है सुधरने का नाम ही नहीं ले पा रहे हैं इतनी जबरदस्त व्यवस्था खराब हो गई है बताते हैं इस पर किसी का ध्यान नहीं है और हमारे भारत सरकार करोड़ों रुपए मरीजों के नाम पर यहां वहां फालतू पैसा करोड़ के तादाद में खर्च हो रहा है मगर मेरी जे को जांच करना है तो उसको महीना से ऊपर की डेट समय मिलेगा इस पर क्यों ध्यान नहीं दिया जा रहा है
इसमें किसकी लापरवाही है ऐसे कर्मचारी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से बाहर करने की बात तक कह रहे हैं
समाजसेवी लोगकई वरिष्ठ डॉक्टर लोगों की ओपिनियन है कि तानाशाह जब तक बैठेंगे तब तक मरीजों का कल्याण नहीं होगा मरीजों के कल्याण के नाम का पैसा यहां वहां बर्बाद कर रहे हैं एम्स के कुछ लोग उसे पर भी अंकुश लगना चाहिए करोड़ों रुपए बर्बाद होने के बावजूद भी सेम डे में कोई इलाज नहीं हो पा रहा है एम्स में गरीब को ₹500000 दे दो तो वह अपना प्राइवेट में कहीं ठीक से अच्छा इलाज हो जाएगा इसके पीछे 50 अस्पताल के कर्मचारी आगे पीछे घूमेंगे एम्स में डॉक्टर के पीछे कर्मचारियों के पीछे घूमना पड़ता है
प्राइवेट में मरीजों के आसपास 50 लोग घूमेंगे क्योंकि वह पैसा दे रहा है सरकारी अस्पताल में लापरवाही का ज्यादा महत्व है 60% अच्छे डॉक्टर ठीक से कार्य कर रहे हैं मगर इससे पूरी व्यवस्था सुधारने पर हम विश्वास ना करें राष्ट्र का सबसे अच्छा बढ़िया हॉस्पिटल बताया जाता है जहां सबसे ज्यादा लापरवाही और कागजों पर 60% चलता है
ऐसे भी सूत्रों से जानकारी प्राप्त हो रही है इसको भी संज्ञान में लेना पड़ेगा बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग चैंबर बनकर बैठे रहते हैं डॉक्टर मगर गंभीर भारी जो को नहीं देख पाते हैं यदि मरीज आ गया है तो उसको वापस ही जाना पड़ेगा डॉक्टर चैंबर में बैठकर मोबाइल खेलते रहेंगे ऐसी भी जानकारी सूत्रों से प्राप्त हो रही है
सचमुच में बड़ी संख्या में अच्छे कर्मचारी अधिकारी कार्य करने वाले हैं मगर कछुए के चाल से काम करने वाले एक्स-रे डिपार्मेंट ब्लड कलेक्शन ओपीडी और लंबी डेट चेंबर में अधिकतर डॉक्टर लोग मोबाइल खेलते नजर आते हैं इस प्रकार की बातें पर हमें विशेष ध्यान रखना होगा
मरीज की सुविधा पर गवर्नमेंट को ध्यान देना होगा कर्मचारी पर किसी का लगाम नहीं है मनमानी कर रहे हैं तानाशाह वाला माहौल तैयार करके रखा है जब एम्स एक मात्र भारत में था तब 6 महीना की डेट मिला करती थी आज भी 15 एम्स होने के बाद उतने ही महीने की डेट मिल रही है कर प्रणाली में सुधार नहीं आया है लापरवाही के नाम से कलंकित हो रहे हैं एम्स की छवि खराब होने से बचने पर विचार करना होगा तत्काल अभिलंब महामहिम राष्ट्रपति जी से हमारा अनुरोध है कि इस विषय पर उच्च स्तरीय जांच करवरकर दोषियों के प्रति सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और हमारे निर्दोष कर्मचारियों को इन परेशानियों से बचाया जाए दोषियों पर सख्त अभिलंब कड़ी कार्रवाई होना चाहिए.
डिस्क्लेमर उपरोक्त लेक विनोद सूर्यवंशी जो भोजपुरी टाइम्स के पत्रकार भी रहे हैं द्वारा लिखित है। उपरोक्त लेख के लिए लेखक स्वयं पूर्णतया जवाब दे है और यह उनके अपने अभिव्यक्ति है इससे हमारे न्यूज़ एडिटर टीम एवं संपादक प्रबंधक किसी भी जवाब देही के लिए उत्तरदाई नहीं है।

