नर्मदापुरम/ (प्रीति चौहान) विजयादशमी व शस्त्र पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। दृक पंचांग के अनुसार यह शुभ पर्व नवरात्रि पर्व के दसवें दिन मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत में मनाया जाने वाला दशहरा पर्व इस साल 5 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाया जा रहा है। दशहरा को विजयदशमी इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यह वह दिन है जब भगवान राम ने राक्षस राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी। “विजयादशमी” शब्द का अर्थ है।
“*विजय का दिन*”
इस दिन विशेषतः राजपूत क्षत्रिय समाज द्वारा शस्त्र-पूजा की जाती है,और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन स्थान-स्थान पर मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है। (संकलन – प्रीति चौहान)
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