

नर्मदापुरम / शिवार्चन समिति के तत्त्वाधान एवं आचार्य सोमेश परसाई के सान्निध्य में सम्पूर्ण मास आयोजित होने वाले महारुद्राभिषेक में आज द्वितीय श्रावण सोमवार के उपलक्ष्य में शिवभक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि संत का प्रत्येक क्षण मत्त्वपूर्ण होता है। इसकी महत्व को समझते हुए जो ज्ञान भक्ति उनसे अर्जित कर सकते हैं अर्जित कर लेना चाहिए । थाली में अन्न भी नही छोड़ना चाहिए प्रयास करना चाहिए कि एक कण भी थाली में न छुटे । आचार्य श्री ने कहा कि हमने सैनिक और कृषक का सम्मान करना चाहिए । क्योंकि एक देश की रक्षा करता है और दूसरा देश की खाद्य आपूर्ति करता है । देश मे सैनिकों एवं कृषकों को शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है। हमारी सेना बलवान होगी तो दुश्मन नज़र नही उठाएगा और यदि किसान मजबूत होगा तो देश का विकास होगा । लेकिन आज आवश्यकता है कि हम खाद्य आपूर्ति के विषैले तरीकों को छोड़ कर वापिस पारंपरिक तरीकों पर आए । हम जैविक खेती को प्रोत्साहित करें जिससे कि हम देश को स्वस्थ बलवान और बुद्धिमान बना सकें ।
शिवपुराण के श्लोक की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति 41 दिन तक पारदेश्वर भगवान की नमक-चमक विधि से कुशा के रस से रुद्राभिषेक करता है भगवान उसके असाध्य रोग भी समाप्त कर देते हैं । तत्पश्चात आचार्य श्री ने कहा कि 41 दिन तक भगवान के 108 नाम से भगवान को बिल्वपत्र चढ़ाने मात्र से मनवांशित फल की प्राप्ति हो जाती है। इसके पूर्व भगवान का हर-हर महादेव के जयकारे के मध्य रुद्राभिषेक किया गया भगवान की संगीतमय स्तुतियों का गान किया गया, तत्पश्चात भगवान का सुंदर श्रृंगार किया गया । इसके बाद भगवान की दिव्य भस्मारती एवं महाआरती की गई ।

