
ग्वालियर / न्यायालय शिवानी सैनी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ग्वालियर (म. प्र.) द्वारा आरोपी 1- दामोदर शुक्ला पुत्र भोजराज शुक्ला, आयु-75 वर्ष, व्यवसाय खेती, 2-अन्नपूर्णा शुक्ला पति दामोदर शुक्ला, आयु-70 वर्ष, व्यवसाय-गृहणी, 3-भूपेन्द्र उर्फ हुण्डा पुत्र चामोदर शुक्ला, आयु 40 वर्ष, व्यवसाय-खेती, 4-श्रीमती मीरा पति भूपेन्द्र उर्फ हुण्डा, आयु 40 वर्ष, व्यवसाय-गृहणी, 5-श्रीमती अनीता पत्ति स्व. विजय कुमार शुक्ला, आयु 35 वर्ष, व्यवसाय गृहणी निवासीगण ग्राम सिरसौद, हस्तिनापुर, जिला ग्वालियर, हाल निवासीगण अल्पना टाकीज, मुरार ग्वालियर (म.प्र.) को धारा 420 भा.द.स. में दो वर्ष का साधारण कारावास एवं 4,000/- रूपये का अर्थदण्ड। अर्थदण्ड के व्यतिकम में दो माह का साधारण कारावास से दंडित किया गया। ए. डी.पी.ओ. अभय प्रताप सिंह राठौर ने प्रकरण की घटना के बारे में बताया कि फरियादी सुनीता शर्मा के पति भारतीय सेना में नायक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, उसने मुरार में एक प्लाट लेकर मकान बनवाया था तथा उसे उसकी ससुराल से जमीन मिली थी और उसके स्वयं के पास 12 तोला के लगभग सोने के जेवरात थे। फरियादी के पति का निधन दिनांक 25 फरवरी 2010 को हुआ था। फरियादी एवं उसके पति की कोई औलाद नहीं थी। फरियादी के पति के निधन के पश्चात उसे कैंसर होने से रिश्ते के चाचा दामोदर शुक्ला, चाची अन्नपूर्णा शुक्ला, चचेरे भाई टुण्डा उर्फ भूपेन्द्र, चचेरे भाई विजय शुक्ला एवं मीरा तथा अनीता ने फरियादी के घर पर आकर कहा कि वे उसकी देखभाल करेंगे तो फरियादी उनकी बातों में आ गई। कुछ समय बाद अभियुक्तगण ने षडयंत्र कर फरियादी से कहा कि कैंसर की बीमारी है और कैंसर के मरीज की मौत भी हो सकती है और उसके मरने के पश्चात विवाद हो सकता है इसलिए वसीयत कर दो, फरियादी के मरने के बाद वारिस के संबंध में कोई विवाद नहीं होगा। फरियादी को वसीयत करने की कहकर ले गये और उसके साथ धोखाधडी कर उसके चचेरे भाईयों ने अपनी-अपनी पत्नियों के नाम एक लाख रूपये मात्र में उसके मकान की धोखाधडी करके रजिस्ट्री करवा ली। फिर अनीता ने मीरा को साढे सात लाख रूपये में रजिस्ट्री कर दी और बाद में एक अन्य व्यक्ति को बारह लाख रूपये से ज्यादा की राशि में मकान बेच दिया। जब वो व्यक्ति फरियादी सुनीता से मकान खाली कराने आया तो उसे पता लगा की आरोपीगण ने वसीयत की कहकर एक लाख रूपये मात्र में उसके मकान को धोखे से खरीद लिया है। फरियादी सुनीता के लिखित शिकायती आवेदन के आधार पर पुलिस थाना मुरार, जिला ग्वालियर में अभियुक्तगण के विरूद्ध अपराध कमांक 404/13 अंतर्गत धारा 420, 406, 294 सहपठित धारा 506 भारतीय दण्ड संहिता पंजीबद्ध कर प्रकरण अनुसंधान में लिया गया। अनुसंधान के दौरान फरियादी की निशानदेही पर घटना स्थल का मानचित्र तैयार कर साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किये गये। अभियुक्तगण को गिरफ्तार किया गया। शेष आवश्यक अन्वेषण पूर्ण कर, अभियोग पत्र दिनांक 27.02.2015 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिस पर से न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाकर प्रकरण आरसीटी कं. 1473/15 पर दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान आरोपीगण को गिरफ्तार किया गया। जप्ती पत्रक बनाया गया तथा साक्षीगण के कथन अंकित किये गये एवं अन्य कार्यवाही की गई बाद विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया।
संपूर्ण विचारण के दौरान शासन की ओर से पक्ष रख रहे ए.डी.पी.ओ अभय प्रताप सिंह राठौर ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य एवं तर्कों के माध्यम से सिद्ध किया कि व्यक्ति झूठ बोल सकते है। लेकिन घटनाएं झूठ नहीं बोलती और प्रकरण में बाईक से भी कम कीमत पर फरियादीया के मकान की रजिस्टी करा लेना बताता है कि आरोपीगण ने फरियादी सुनीता के साथ धोखाधड़ी करते हुये उसके मकान की गलत रजिस्ट्री कराई है। उक्त तर्कों एवं साक्ष्य से सहमत होकर ही माननीय न्यायालय जे.एम.एफ.सी. शिवानी सैनी द्वारा आरोपीगण को धारा 420 भा. द. स. में दो वर्ष का साधारण कारावास एवं 4,000/- रूपये का अर्थदण्ड से दंडित किया साथ ही फरियादी को दस हजार रूपये प्रतिकर दिये जाने का निर्णय सुनाया ।

