
नर्मदापुरम / रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन का अनमोल त्यौहार है । बहन के हाथों से भाई के हाथों में बांधा गया रक्षा सूत्र रक्षा कवच से कम नही। भाई के द्वारा इसे सहेजने विशेष की परंपरा भी है। भाई बहन के इस त्यौहार को विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमे राखी रक्षा शुत्र का विशेष महत्व है यह धागा कोई आम नही होता इसमे फर्ज , हक, जिम्मेदारी जैसे कई शब्द छुपे हैं। इस सब को देखते हुए भीम बेटका पर्यटन स्थल की ग्रामीण महिला बहनों ने इको-फ्रेंडली राखी तैयार की हैं। जिसमे नर्मदा जी की मिट्टी के साथ मां नर्मदा का आशीर्वाद भी शामिल है राखियां इतनी सुंदर हैं कि भाइयों की कलाई तो सजेगी ही साथ ही इन्हें बाद में फ्रीज मैगनेट या अन्य तरीके से घर की सजावट में उपयोग में लाया जा सकता है। मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की सेफ पर्यटन स्थल स्कीम के तहत भोपाल एवं रायसेन में कार्य कर रही संगिनी संस्था द्वारा लगातार प्रशिक्षण देकर महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है उसमें से एक प्रशिक्षण राखी बनाने को लेकर भी महिलाओं को दिया गया है। जिससे महिलाएं इसका उपयोग कर आत्मनिर्भर बने आज शहर में जगह जगह महिलाओं द्वारा राखियां बाजार में बिक रही हैं ओर उन्हें अपनी मेहनत के अच्छे दाम स्वंय को मिल रहे हैं।
*तैयार की गई राखियां इको फ्रेंडली हैं*
संगिनी संस्था की संचालन कर्ता प्रार्थना मिश्रा ने बताया कि इस स्कीम का उद्देश्य पर्यटन स्थल पर्यटकों खासकर महिला पर्यटकों के लिए सुरक्षित हो। इसके लिए नजदीकी गांव की महिलाओं को उनकी योग्यता के अनुसार तैयार किया जा रहा है, ताकि यह महिलाएं सशक्त ओर आत्मनिर्भर बनें। उनका अनुभव और आत्मविश्वास बढ़े ।
*खुद कमाने की अनूठी खुशी*
ग्रामीण महिला द्वारा बताया गया कि मैने पहले तो माटी कला की ट्रेनिंग ली। शुरू में तो संगिनी और पर्यटन बोर्ड से हमने समझ ही नहीं आ रहा था की ये हमारे लिए इतना क्यों कर रहे लेकिन मेने इनसे सहयोग लिया और मिट्टी से बनने वाले सामान का प्रशिक्षण लेकर प्रशिक्षित हुई ,पहले मेने सोचा में मिट्टी से कैसे कमाऊंगी। अब बहुत सारे प्रोडक्ट बना कर बेच रही हूं। खुद कमाने की खुशी है।
कलाकार सलमा बी द्वारा बताया गया महिलाएं अच्छा ही नही बहुत अच्छा कर सकती हैं प्रशिक्षण के दौरान हमने महिलाओं को नर्मदा की मिट्टी से ज्वैलरी, गौहर महल और भोजपुर की मिट्टी की बनी रिप्लिका, राजा भोज और भोजपुर शिवलिंग पर आधारित की-चेन और डेकोरेटिव आइटम बनाना सिखाया ।
महिलाओं द्वारा बनाई गई एक राखी की कीमत 50 रुपए है। प्रार्थना ने कहा कि प्लास्टिक की राखी बांधने के कुछ दिन बाद इधर-उधर पड़ी मिलती है। जबकि इसमें मैगनेट लगाकर इसे फ्रिज या कार में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
गीता यादव कलाकार ने बताया रक्षाबंधन के लिए मां नर्मदा की मिट्टी से बनी राखी बांधना भाई का सौभाग्य होगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जो मैं ऐसे प्रोडक्ट बनाकर लोगों तक पहुंचा रही हूं। सोचा नहीं था कि ट्रेनिंग का लाभ मिलेगा।
जिला पर्यटन प्रबंधक मनोज सिंह ठाकुर द्वारा बताया गया मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा महिलाओं हेतु सुरक्षित पर्यटन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहुत से प्रशिक्षण से महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है मध्यप्रदेश के प्रत्येक पर्यटन स्थलों पर महिलाओं को स्वंय के द्वारा बनाई गई वस्तुओं के स्टॉल लगे देखे जा सकते हैं इसी तारतम्य में इस भाई बहन के त्यौहार में प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा राखियों का निर्माण किया गया है जिसे बेचकर खुद भी सक्षम होंगी और भाइयों की कलाई भी सुंदर दिखेगी।

