
नर्मदापुरम / श्री नर्मदा शंकर ब्राह्मण सेवा समिति के तत्वाधान में समस्त ब्राह्मण समाज श्रावण पूर्णिमा को प्रातः 6 बजे से सेठानी घाट पर श्रावणी उपाकर्म महोत्सव मनाया एवं श्रावणी उपाकर्म किया गया । इस अवसर पर ब्राह्मणों द्वारा हेमाद्रि संकल्प, दशविध स्नान, देव तर्पण, ऋषि तर्पण, पितृ तर्पण, सप्त ऋषि पूजन,पंचांग पूजन यज्ञोपवीत पूजन एवं जनेऊ धारण कर हवन होम किया। इस अवसर पर नगर के सभी अचार्य गण वैदिक एवं विद्वान ब्राह्मण एवं बटुक सहित यज्ञोपवीत को धारण करने वाले सभी सनातनी उपस्थित रहे । श्रावणी उपाकर्म में शरीर मन और इंद्रियों को पवित्र करने के साथ यज्ञोपवीत पूजन एवं उपनयन संस्कार का विधान है। सनातन संस्कृति की जयघोष का उत्सव है रक्षाबंधन। संस्कृत दिवस के रूप में देववाणी संस्कृत के अस्तित्व को स्वीकार करने का है यह उत्सव।श्रावणी कर्म न केवल ब्राह्मण समाज के गौरव का उत्सव है बल्कि जिन जिन जातियों को यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार मिला हुआ है उन सभी जातियों के गौरवशाली इतिहास का उत्सव है रक्षाबंधन और श्रावणी कर्म। सनातन संस्कृति के जयघोष का है यह त्योहार। ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर भी कर्मकाण्ड से दूर रहने का वेदों में सबसे सबसे बड़ा पाप माना है। दैनिक षट्कर्म के त्याग का भी दोष माना गया है। अग्नि नहीं जिमाने का भी दोष माना है।जो विप्र देवता कर्मकाण्ड करते हैं उन्हीं को दोष लगता है ऐसा नहीं है । दोष उनको भी लगता है जिसने वर्ण व्यवस्था का त्याग किया है।हम सभी परान्न ग्रहण करते हैं या वर्ष में एक बार भी दाता बनकर आय का दशांश दान पुण्य नहीं करते हैं।
ऐसी स्थिति में वज्रलेप के समान पाप आवृत्त हो जाते हैं जो केवल और केवल श्रावण पूर्णिमा के दिन भद्रा रहित मुहूर्त में जलाशय के किनारे या किसी पवित्र नदी के तट या तीर्थ क्षेत्र में या गौशाला में हेमाद्रि संकल्प श्रवण करने से, दशविध स्नान करने से,पितरों के और ऋषियों के ऋण से उऋण होने से उन्हें यज्ञोपवीत दान, रक्षासूत्र दान करने से सनातन संस्कृति की रक्षा का पुण्य प्राप्त होता है।और वज्रलेप के समान किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। समग्र हिंदू समाज के सामाजिक समरसता के साथ साथ तिलक, शिखा सूत्र धारियों के संगठन का उत्सव है। अन्य समाज के लोगों को भी देखना चाहिए कि हम जिसको भू देवता मानकर पूजन कर रहे हैं वे सनातन संस्कृति के श्रावणी कर्म के इस त्योहार को संगठित होकर मना रहे हैं या नहीं मना रहे हैं। प्रायश्चित कर्म में भाग लेकर नवीन ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं या नहीं
नर्मदापुरम नगर के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि इस वर्ष भी सामूहिक श्रावणी उपकर्म में ब्राह्मण सहित क्षत्रिय एवं वैश्य समाज के लोग सम्मिलित रहे ।
गोपाल मंदिर के अर्चक आचार्य सुरेश शर्मा एवं आचार्य पंकज पाठक के आचार्यत्व में श्रावणी उपाकर्म सम्पन्न कराया गया। मां नर्मदा शंकर ब्राह्मण सेवा समिति नर्मदापुरम के तत्वावधान मे विगत वर्ष के निर्णय अनुसार नगर के सभी ब्राह्मण के द्वारा इस वर्ष भी सामूहिक श्रावणी उपाकर्म किया । उक्त अवसर पर
आचार्य सोमेश परसाई, अध्यक्ष आचार्य अखिलेश केशवरे, पंडित गोपाल प्रसाद खड्डर, पं. सुरेश शर्मा गोपाल मंदिर, पं.भालचंद्र खड्डर, आचार्य पंकज पाठक, डॉ. पं. पुष्कर परसाई, पं.अजय दुबे, पं. तरूण तिवारी, पं. सत्यम दीवान, पं. सद्भव तिवारी, पं. नकुल दुबे, पं. संजय मिश्रा, पं. रिषी दुबे, पं. सौरभ पालीवाल, पं. अक्षय दुबे, पं. ईशान परसाई, प्रणव केशवरे, पं.अर्जुन तिवारी, पं. गौरव शर्मा, अश्विनी शर्मा, दीपक दुबे, पं. दिनेश शर्मा, पं. अभिषेक शर्मा, आदित्य पराशर, अभिषेक तिवारी, वैभव मिश्रा, आयुष शर्मा, पं. कैलाश दुबे, आदित्य उपाध्याय, विदित उपाध्याय, रविन्द्र पांडेय, पं. रोहित दुबे, ऋत्विक दुबे, पं. विहान पाठक, पप्पू भदौरिया, भरत, गोलू रघुवंशी, प्रकाश गुप्ता सहित ब्राह्मण समाज संगठनो के प्रतिनिधिमंडल एवं मंदिर समिति के सदस्यों सहित बनारस वृंदावन भोपाल विदिशा इटारसी पिपरिया, गौहरगंज, रायसेन, माखननगर, राजगढ, छत्तीसगढ के ब्राह्मण उपस्थित रहे ।
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