
नर्मदापुरम / नर्मदांचल की सशक्त प्रतिनिधि और राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने बुधवार को एक बार फिर सदन में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के करोड़ों छात्रों और युवाओं से जुड़े एक ज्वलंत मुद्दे को उठाया, जिससे वर्तमान में लाखों छात्र प्रभावित हो रहे हैं। सांसद नारोलिया ने कहा कि केंद्रीय सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में OBC आरक्षण का लाभ उठाने के लिए हर वर्ष नया जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। जबकि अन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है। उन्होंने सभापति से कहा, “यह दोहरा मापदंड न केवल अनुचित है, बल्कि इससे लाखों छात्र हर साल अनावश्यक प्रशासनिक झंझटों में फंस जाते हैं। समय, संसाधन और ऊर्जा की बर्बादी होती है। कई बार योग्य उम्मीदवार अंतिम तिथि तक प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण अवसरों से वंचित रह जाते हैं।”
सांसद नारोलिया ने सरकार से मांग की कि OBC वर्ग के लिए भी SC/ST वर्ग की तरह स्थायी जाति प्रमाण पत्र को मान्यता देने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि यदि इस दिशा में कोई प्रक्रिया या प्रस्ताव सरकार द्वारा तैयार किया गया है, तो सदन को इसकी जानकारी दी जाए। और यदि अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है, तो सरकार को इस पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
राज्यसभा में माया नारोलिया की यह पहल देशभर के OBC छात्रों के लिए राहत का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उनकी तार्किक और स्पष्ट बातों को लेकर सदन में भी सराहना देखी गई।
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