
नर्मदापुरम / प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी शहीद अमृता देवी विश्नोई के बलिदान दिवस 28 अगस्त को भारतीय मजदूर संघ प्रति पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया । कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नृपेंद्र सिंह ने की। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती वंदना राजौरिया प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय मजदूर मध्य प्रदेश ने भाषण में बताया कि सन् 1930 में राजस्थान के जोधपुर रियासत के राजा ने खेजड़ी ग्राम में अपना महल बनवाने हेतु पेड़ों को काटने का आदेश दिया और राजा के सैनिक पेड़ काटने खेजड़ी ग्राम पहुंचे तो अमृता देवी विश्नोई एवं ग्राम के अन्य लोगों ने सैनिकों को पेड़ काटने से मना किया तब भी सैनिक नहीं माने और राजा का आदेश कह कर पेड़ काटने लगे तब अमृता देवी विश्नोई ने यह नारा दिया कि “सिर साठे पर रूख रहे तो भी सस्ता जाड़” और उनकी तीन पुत्रियों सहित सभी ग्रामीण पेड़ों से चिपक गये। इस पर सैनिकों ने पेड़ों के साथ साथ इन्सानों को भी काट दिया। इस घटना में अमृता देवी विश्नोई और उनकी तीन पुत्रियों समेत 363 पर्यावरण मित्रों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। जब राजा को इस घटना का पता चला तो वह बहुत दुखी हुआ और स्वयं खेजड़ी ग्राम पहुंचकर अपने सैनिकों को पेड़ ना काटने का आदेश दिया। श्रीमती राजौरिया ने बताया कि सम्पूर्ण विश्व में अमृता देवी विश्नोई के इस बलिदान को पर्यावरण हेतु प्रथम बलिदान भी माना जाता है। इस अवसर पर पर्यावरण मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह चौहान, दशरथ तिवारी, नरेन्द्र व्यास, सुनील चौहान, योगेन्द्र शर्मा एवं अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सरस्वती विद्या मंदिर मालाखेड़ी रोड नर्मदापुरम के प्रांगण में फलदार एवं औषधीय पौधे रोपित किए।

