
नर्मदापुरम / पर्व: भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, नक्षत्र एवं राशि: शतभिषा नक्षत्र, कुम्भ राशि, विशेष संयोग: पितृपक्ष के पूर्व का यह चन्द्र ग्रहण धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसी दिन पूर्णिमा व्रत और पूर्णिमा श्राद्ध भी है।
*समय सारणी*
सूतक प्रारम्भ: दोपहर 12:57 बजे से (ग्रहण से 9 घंटे पूर्व)
ग्रहण प्रारम्भ (स्पर्श): रात्रि 9:57 बजे
ग्रहण मध्य: रात्रि 11:41 बजे
ग्रहण मोक्ष (समापन): रात्रि 1:27 बजे (8 सितम्बर)
सूतक प्रारम्भ होने से पहले भोजन कर लेना चाहिए।
बालक, वृद्ध एवं रोगी रात्रि 9:00 बजे तक भोजन कर सकते हैं।
ग्रहण काल में किसी को भी भोजन, पकाना या वस्तु काटना वर्जित है।
*ग्रहण काल में वर्जित कार्य*
1. मंदिर में प्रवेश या भगवान की मूर्ति का स्पर्श न करें।
2. भोजन, फलाहार या पानी का सेवन न करें।
3. सब्ज़ी या अन्न काटना-पकाना वर्जित है।
4. मैथुन एवं शयन न करें (विशेषकर गर्भवती महिलाओं को)।
5. गर्भवती महिला घर से बाहर न जाएँ।
*ग्रहण काल में क्या करें*
1. खाने-पीने की वस्तुओं में कुशा या तुलसी पत्ते डालकर सुरक्षित रखें।
2. निरंतर भगवन्नाम जप, गुरु मंत्र, यज्ञोपवीत धारण करने वाले गायत्री मंत्र, या रामायण पाठ/कीर्तन करें।
3. गर्भवती महिलाएँ—
सूतक लगने से पूर्व दाहिने हाथ या शरीर पर कुशा बांध लें।
ग्रहण प्रारम्भ से पहले उदर (पेट) पर गाय के गोबर का पतला लेप लगाएँ।
ग्रहण काल में शयन न करें और पूर्ण सावधानी बरतें।
4. ग्रहण समाप्ति पर—
गंगा स्नान अथवा घर पर स्नान करें।
स्नान के बाद घर और देवस्थान को शुद्ध करें।
अन्नदान और दान-पुण्य करें।
*धार्मिक महत्व*
यह ग्रहण कुम्भ राशि और शतभिषा–पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पर लग रहा है।
पितृपक्ष के पहले का होने से इसका प्रभाव मिला-जुला माना गया है।
आज का दिन पूर्णिमा व्रत एवं पूर्णिमा श्राद्ध का भी है।
श्राद्ध कार्य सूतक लगने से पहले (दोपहर 12:57 तक) ही कर लेना चाहिए।
*उपसंहार*
चन्द्र ग्रहण केवल खगोल का अद्भुत दृश्य नहीं, बल्कि हमारे लिए आत्मशुद्धि और साधना का महापर्व है। इस समय सांसारिक कार्यों से विरत होकर जप, कीर्तन, दान और स्नान में मन लगाना चाहिए। यही हमारे शास्त्रों का उपदेश है।
(संकलन-प्रीति चौहान)

