इटारसी- रेल्वे स्टेशन के कुलियों के द्वारा स्टेशन के मुख्य गेट के सामने मुख्य मार्ग के पास 1950 से पहले बनाये गये दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर का यातयात सुगमता और तथाकथित विकास के नाम पर हुआ स्थान परिवर्तन के घटनाक्रम में रोज नये नये राज खुलासा हो रहे है।
सीधे सीधे शब्दों में कहे तो मंदिर का निर्माण और स्थापना अधर्म की नीतियों का पालन करते हुये किया गया है।
नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 नगर सीमा के अन्दर निज और शासकीय स्थायी लीज भूमि पर भवन या मंदिर निर्माण के लिये अनुमति के लिये भू-स्वामी को बाध्य करती है।
किन्तु मंदिर गोठी धर्मशाला की स्थायी शासकीय भूमि पर निर्माण कर स्थापित किया गया और न तथाकथित भू-स्वामी द्वारा कलेक्टर एस डी एम और नगरपालिका इटारसी से कोई वैध अनुमति नही प्राप्त की।
इस बारे में 28 अक्टूबर 25 को लोक सूचना अधिकारी नपा इटारसी से भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की अन्तर्गत जब लोक दस्तावेज की जानकारी मांगी तो 12 दिसम्बर 25 को पत्र क्रमांक 300 के द्वारा जानकारी दी गई कि गोठी धर्मशाला न्यास या मंदिर के निर्माण करने वाली किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा नपा कि भवन निर्माण शाखा में अनुमति के लिये किसी भी प्रकार का आवेदन और दस्तावेज प्रस्तुत नही किये गये।
जबकि पूरे नगर ने खुली आंखों से नगर के प्रशासनिक अधिकारी व प्रथम नागरिक तथा एक कालनेमी को प्रति दिन मंदिर के निर्माण कार्य करते हुये देखा जा रहा था।
उक्ताशाय कि जानकारी देते हुये श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर संघर्ष समिति के संरक्षक गोपाल सोनी ने बताया कि हम विकास के विरोधी नही है पर सीधे सीधे दिखाई दे रहा है कि अधर्म के दबाब में धर्म की को असहाय किया गया है,जिसकी चारों और निन्दा हो रही है, क्या नपा अध्यक्ष और सी एम ओ इटारसी नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 का पालन नही करने पर कोई कार्यवाही करती या नही धर्मप्रेमी नगरवासी इंतजार कर रहे है।
*जारीकर्ता*
गोपाल सोनी
संरक्षक
श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर संघर्ष समिति इटारसी

