टीकमगढ़। बुंदेलखंड की बहुप्रतीक्षित ललितपुर–टीकमगढ़–खजुराहो–सिंगरौली रेल लाइन का सपना करीब पांच दशक पहले देखा गया था। इसकी पहली आवाज वर्ष 1977 में खजुराहो से तत्कालीन सांसद श्री लक्ष्मी नारायण नायक ने संसद भवन में उठाई थी। वर्ष 1978 में मोरारजी देसाई सरकार के दौरान इस परियोजना के सर्वे को मंजूरी मिली, लेकिन इसके बाद यह रेल लाइन 1996 तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही।
वर्ष 1996 में महोबा–खजुराहो रेल लाइन को सर्वे और स्वीकृति मिली। इसके अगले ही साल 1997 में अटल बिहारी वाजपेयी के खजुराहो आगमन के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती के भागीरथी प्रयासों से इस परियोजना को नई गति मिली। परिणामस्वरूप 2008 में महोबा–खजुराहो, 2013 में ललितपुर–टीकमगढ़ और 2016 में टीकमगढ़–खजुराहो रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। वर्ष 2016-17 तक यह पूरा क्षेत्र एक बड़े रेल नेटवर्क से जुड़ गया।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पूरी, फिर भी ट्रेनों की कमी
जनवरी 2026 तक ललितपुर–टीकमगढ़–खजुराहो–महोबा रेल लाइन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल प्रणाली और ललितपुर से खजुराहो तक कार्ड लाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिससे ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की तकनीकी क्षमता उपलब्ध हो गई है। इसके बावजूद इस रेल लाइन पर वर्तमान में ट्रेनों की संख्या न के बराबर है। रेल विभाग के अनुमान के अनुसार 2030 तक संपूर्ण ललितपुर–खजुराहो–सिंगरौली रेल लाइन के पूर्ण होने की संभावना है।
समय-समय पर ललितपुर, टीकमगढ़, खजुराहो और छतरपुर में समाजसेवी संगठनों द्वारा रेल और स्टेशन सुविधाओं की मांग उठाई जाती रही है। स्थानीय निवासी मनीराम कठैल ने कहा कि मानवीय संवेदना समिति के माध्यम से लगातार ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और स्टेशन सुविधाओं के विस्तार की मांग की जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।
बुंदेलखंड की जरूरतों के अनुसार ट्रेनें और डबल लाइन की मांग
समाजसेवी इरफान अहमद ने बताया कि इस रेल लाइन से बुंदेलखंड के मरीजों, विद्यार्थियों और न्यायिक कार्यों के लिए भोपाल हाईकोर्ट जाने वालों को बड़ी सुविधा मिल सकती है। उन्होंने अजमेर, लखनऊ, जबलपुर, पारसनाथ, गया, हावड़ा, कोटा और माता वैष्णो देवी कटरा जैसे प्रमुख धार्मिक व शैक्षणिक स्थलों के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की।
वहीं विनोद जैन सकैरा ने ललितपुर–टीकमगढ़–खजुराहो–महोबा रेल लाइन पर डबल लाइन बिछाने और खजुराहो से पन्ना के बीच कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। अंकुर जैन ‘सानू बाबा’ ने कहा कि ललितपुर जंक्शन का निर्माण तो हो गया है, लेकिन सुविधाएं बेहद सीमित हैं, यहां से ट्रेनों की संख्या और स्टॉपेज बढ़ाए जाने चाहिए।
देवेंद्र योगी ने बुंदेलखंड के जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे सक्रिय होकर मानवीय संवेदना समिति की मांगों को सरकार तक पहुंचाएं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस रेल लाइन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, डबल लाइन का कार्य शुरू होगा और ललितपुर से सिंगरौली तक संपूर्ण रेल मार्ग शीघ्र पूरा होकर बुंदेलखंड के विकास को नई रफ्तार देगा।
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