टीकमगढ़। पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई के निर्देशन में संचालित “परिवार जोड़ो अभियान” जिले में संवेदनशील, संवाद आधारित और मानवीय पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। यह अभियान इस सोच पर आधारित है कि हर पारिवारिक विवाद का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया से ही नहीं, बल्कि संवाद, समझ, परामर्श और सहानुभूति के माध्यम से भी संभव है।
टीकमगढ़ पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए उन परिवारों को फिर से जोड़ने का कार्य कर रही है, जो आपसी मतभेद, गलतफहमियों और तनाव के कारण टूटने की कगार पर पहुंच चुके थे।
अभियान के तहत पारिवारिक विवादों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर संवाद, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जा रहा है। इस मानवीय पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक जिले में 79 परिवार पुनः एकजुट हो चुके हैं। ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों में लौटी खुशी, विश्वास और मानसिक शांति की सजीव कहानियाँ हैं।
इस अभियान में महिला थाना टीकमगढ़ की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही है। हाल ही में महिला थाना द्वारा एक पारिवारिक विवाद का समाधान अत्यंत संवेदनशीलता, धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया गया। आवेदिका सुलेखा अहिरवार, पत्नी सूरज अहिरवार, निवासी ग्राम श्रीनगर कंगना खैरा, थाना देहात, जिला टीकमगढ़ (वर्तमान निवास कुम्हैडी, थाना महरौनी, जिला ललितपुर, उत्तर प्रदेश) द्वारा अपने पति एवं ससुराल पक्ष के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
महिला थाना द्वारा दोनों पक्षों को बुलाकर विस्तार से काउंसलिंग एवं समझाइश दी गई, जिसके बाद दोनों पक्ष राज़ी-खुशी से पुनः साथ रहने के लिए सहमत हो गए। इस मानवीय हस्तक्षेप से एक और परिवार टूटने से बच गया, जो संवेदनशील पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
“परिवार जोड़ो अभियान” के चलते जिले में दहेज प्रताड़ना के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां 109 प्रकरण दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 50 प्रकरण रह गई, जो 54.12 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। संवाद आधारित पुलिसिंग से न केवल कानूनी विवादों में कमी आई है, बल्कि सामाजिक संतुलन और पारिवारिक सौहार्द भी मजबूत हुआ है।
इस अभियान के परिणामस्वरूप अनावश्यक आपराधिक प्रकरणों में कमी आई है, महिलाओं को संवेदनशील सुनवाई और सुरक्षित समाधान का भरोसा मिला है, वहीं परिवारों में मानसिक तनाव, सामाजिक कलह और कानूनी व्यय में भी कमी दर्ज की गई है। साथ ही पुलिस और आमजन के बीच विश्वास और सहयोग की भावना और अधिक मजबूत हुई है।
इस मानवीय एवं सामाजिक पहल को सफल बनाने में थाना प्रभारी निरीक्षक मथुरा प्रसाद, उप निरीक्षक धनवंती, म.प्र.आर. रामसखी अहिरवार, आरक्षक 579 शिवेंद्र सिंह बुंदेला एवं आरक्षक 537 अनिल वर्मा का योगदान सराहनीय रहा।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर सिंह मंडलोई ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की संस्कृति को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि एक परिवार का बचना पूरे समाज को मजबूत करता है।
टीकमगढ़ पुलिस का “परिवार जोड़ो अभियान” कानून के साथ करुणा और शक्ति के साथ संवेदना का जीवंत उदाहरण बनकर समाज को जोड़ने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रहा है।
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