टीकमगढ़। 1008 पार्श्वनाथ बाजार जैन मंदिर से भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याण महोत्सव के पावन अवसर पर युग 24 में एक विशाल और भव्य शोभायात्रा दोपहर 2 बजे धूमधाम से निकाली गई। यह शोभायात्रा बाजार जैन मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों—स्टेट बैंक चौराहा, पपौरा चौराहा, जेठा चौराहा, पुरानी नगर पालिका, कटरा बाजार, लुकमान चौराहा, सिंधी धर्मशाला, सेल सागर, गांधी चौराहा होते हुए राजेंद्र पार्क स्थित मानस मंच पहुंची।
आकर्षण का केंद्र रहा रजत दिव्य रथ
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने बताया कि शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रजत (चांदी) का दिव्य रथ रहा, जिसने पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न मंदिरों से आकर्षक विमान रथों पर विराजमान जिन प्रतिमाएं शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थीं।
महिलाओं की सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
शोभायात्रा में घोड़ा-बग्गी, दिव्य घोष, महिला मंडल, आगम पाठशाला के बच्चे एवं बड़ी संख्या में धर्मध्वजा लिए श्रद्धालु शामिल हुए। नृत्य करती महिलाओं की टोली और सजे-धजे घोड़ों ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। समाज की महिलाएं विशेष ड्रेस कोड में शांतिपूर्वक चलते हुए धार्मिक गरिमा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करती नजर आईं।
जगह-जगह पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा शोभायात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी की आरती उतारी और “भगवान महावीर स्वामी की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। पूरी यात्रा अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई।
मानस मंच पर अभिषेक और मुनि संघ का आशीर्वाद
मानस मंच पहुंचकर भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री 108 पावन सागर जी महाराज, मुनि 108 कौशल सागर जी महाराज एवं मुनि सुभद्र सागर जी महाराज के आशीर्वचन और मंगल देशना का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
आयोजन ने दिया आध्यात्मिक सौहार्द का संदेश
इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक सौहार्द का संदेश प्रसारित किया। दिगंबर जैन समाज द्वारा शोभायात्रा की संपूर्ण व्यवस्थाएं सूयसागर पाठशाला को सौंपी गई थीं।
महावीर जयंती: सिद्धांत और संदेश
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख पर्व है, जो उनके जन्म दिवस पर मनाया जाता है। भगवान महावीर स्वामी 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने मानवता को अहिंसा, सत्य और संयम का मार्ग दिखाया।
भगवान महावीर स्वामी के प्रमुख सिद्धांत
अहिंसा: “जीओ और जीने दो” — किसी भी जीव को कष्ट न देना
सत्य: जीवन के हर व्यवहार में सच्चाई का पालन
अस्तेय: जो वस्तु हमारी नहीं, उसे ग्रहण न करना
ब्रह्मचर्य: इंद्रिय संयम और आत्मिक शुद्धता
अपरिग्रह: सीमित संसाधनों में संतोष और सादगी
अन्य महत्वपूर्ण संदेश
सभी जीव आत्मा रूप से समान हैं
क्रोध, लोभ, अहंकार और द्वेष आत्मा के विकास में बाधक हैं
क्षमा, करुणा और मैत्री से ही सच्ची शांति मिलती है
आत्मा की मुक्ति स्वयं के प्रयास से संभव है
महावीर जयंती का संदेश
महावीर जयंती हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और आत्म-संयम को अपनाएं तथा समाज में भाईचारा, दया और सद्भावना का प्रसार करें।
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