कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता के प्रसंग और महाआरती के साथ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन I
इटारसी: स्थानीय द्वारकाधीश मंदिर में सेन परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सुदामा चरित्र के मर्मस्पर्शी प्रसंग के साथ भव्य विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित सौरभ दुबे ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न अलौकिक लीलाओं का रसपान कराया, जिसे सुनकर पांडल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
🌸 मां देवकी के छह पुत्रों की वापसी और सुभद्रा हरण
कथा व्यास ने मां देवकी के आग्रह पर उनके छह मृत पुत्रों को वापस लाकर सौंपने की कथा सुनाई। इसके साथ ही उन्होंने सुभद्रा हरण के आख्यान को विस्तार से सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
🤝 कृष्ण-सुदामा प्रसंग: मित्रता की अद्भुत मिसाल
कथा का मुख्य आकर्षण सुदामा चरित्र रहा। पंडित दुबे ने बताया कि सच्ची मित्रता कैसे निभाई जाती है, यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग से सीखा जा सकता है:
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दौड़े चले आए कन्हैया: जैसे ही द्वारपाल ने महल में जाकर ‘सुदामा’ नाम लिया, प्रभु श्रीकृष्ण नंगे पैर सुदामा-सुदामा पुकारते हुए मुख्य द्वार की ओर दौड़ पड़े और उन्हें गले लगा लिया।
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सिंहासन पर बिठाया: दोनों मित्रों का यह मिलन देख पूरी सभा अचंभित रह गई। प्रभु ने अपने सखा को राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया।
कथा व्यास ने कहा कि जब भी भक्तों पर कोई विपदा आती है, प्रभु उनका उद्धार करने अवश्य आते हैं। भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मनुष्य का जीवन तर जाता है।
🙏 सेन परिवार ने किया पुराण पूजन
कथा के मुख्य यजमान श्री राजाराम सेन, आशीष सेन एवं समस्त सेन परिवार ने पूरे विधि-विधान से श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन-अर्चन कर महाआरती की और भंडारे के साथ कथा का समापन हुआ।

आज का विचार
“सच्ची मित्रता में धन और पद का कोई स्थान नहीं होता; जहाँ केवल निस्वार्थ प्रेम और आदर होता है, वहाँ साक्षात ईश्वर निवास करते हैं।”
✍️ रिपोर्ट: पत्रकार कुणाल पासवान

