प्राकृतिक खेती केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की भी आवश्यकता: कलेक्टर सोमेश मिश्रा l
कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं प्रदर्शनी संपन्न; 300 से अधिक किसानों ने लिया भाग
इटारसी/नर्मदापुरम। विश्व पर्यावरण दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मध्य चलाए जा रहे कृषि आधारित विशेष अभियान के अंतर्गत गुरुवार को बनखेड़ी के गोविंदनगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास) में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन “आत्मा” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से 300 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की।
रासायनिक उर्वरक मानव और मृदा स्वास्थ्य के लिए घातक: कलेक्टर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा:
“प्राकृतिक खेती पर्यावरण एवं वातावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम है। किसान भाई कम से कम अपने दैनिक उपयोग के अनाज, फल और सब्जियों का उत्पादन प्राकृतिक पद्धति से करना शुरू करें। रासायनिक उर्वरकों का निरंतर प्रयोग न केवल मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी समाप्त हो रही है।”
इस अवसर पर कलेक्टर श्री मिश्रा ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विकासखंड सोहागपुर की महिला कृषक एवं कृषि सखी सुश्री पूजा पंदराम को जिले का “प्राकृतिक खेती एम्बेसडर” घोषित कर सम्मानित किया।
लागत घटेगी, बढ़ेगी मिट्टी की ताकत
उपसंचालक कृषि डॉ. रविकांत सिंह ने प्राकृतिक खेती के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पोषक तत्व प्रबंधन, पौध संरक्षण, लागत में कमी और सुरक्षित व गुणवत्तायुक्त उत्पादन ही प्राकृतिक खेती के प्रमुख आधार हैं। रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए अब प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है।
डॉ. राजेंद्र पटेल ने बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) आधारित मॉडल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं देने के लिए प्रत्येक क्लस्टर में जैव उत्पाद केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
उप परियोजना संचालक “आत्मा” श्री गोविंद मीना ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित शासकीय योजनाओं की जानकारी दी।
न्यास के उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह पटेल ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने 75 वर्षों के लंबे अनुभवों को किसानों के साथ साझा किया।
प्रदर्शनी में उमड़ा किसानों का उत्साह
कार्यशाला के दौरान लगाई गई कृषि प्रदर्शनी में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कृषि वैज्ञानिकों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। वैज्ञानिकों ने इस पद्धति को एक जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, तहसीलदार बनखेड़ी अंजू लोधी, जनपद पंचायत सीईओ श्रीमती रीना कुमरिया, न्यास के उपाध्यक्ष मकरन सिंह पटेल, सदस्य अनिल बारोलिया, प्रबंधक धर्मेन्द्र गुर्जर, सहायक संचालक चेतन मातीखाये, और प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेश कुमार नामदेव सहित कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जन अभियान परिषद तथा राज्य आजीविका मिशन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कृषि विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार गर्ग ने सभी अतिथियों एवं कृषकों का आभार व्यक्त किया।
आज का विचार: “धरती को बचाना है, तो रासायनिक जहर छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाना है।”
– पत्रकार कुनाल पासवान

