प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/नगर के श्री वनस्थली हायर सेकेंड्री स्कूल में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा व्यास भागवत आचार्य पंडित सोमनाथ शर्मा ने श्रीमद् भागवत कथा को प्रारंभ करते हुए कहा कि यह मार्गशीर्ष माह भगवान श्री कृष्ण के समान ही है। गीता में भगवान ने अर्जुन को बताया है कि हे अर्जुन महीनों में मैं मार्गशीर्ष माह में हूं और भागवत कथा भी साक्षात भगवान श्री कृष्ण का ही विग्रह है। श्रीमद्भागवत की कथा देवताओं को भी दुर्लभ है यह भागवत की कथा भगवान की कृपा से प्राप्त हो पाती है। कार्तिक मास में यह अवसर ङाक्टर श्रीमती अजली मिश्रा गुप्ता, एडव्होकेट अमित गुप्ता समाजसेवी को मिला है । जिसमें श्रीमद्भागवत का आयोजन कर पा रहे हैं उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा भगवान की प्राप्ति कराने वाली है। यह कथा मृत्यु के भय को दूर करके भगवान की और आगे बढ़ाती है और भक्ति के साथ-साथ हमारे ज्ञान वैराग्य को बल देती है। श्रीमद्भागवत की कथा 7 दिनों का एक ऐसा आयोजन है। जिसमें 7 सौपान है जिनके माध्यम से एक-एक करके हम प्रत्येक सोपान पर बढ़ते जाते हैं और अंत में अपने जीवन का लक्ष्य जान जाते हैं। श्रीमद्भागवत में भक्तों की ऐसी दिव्य कथाएं हैं जिनको सुनकर हृदय में भक्ति का उदय होता है और साथ ही साथ मनुष्य के जीवन में सुधार होता है। वह मनुष्य अपना जीवन तभी पूर्ण कर सकता है, जब वह भगवान की भक्ति करेगा। श्रीमद्भागवत में गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि अधिकारी ने बांस में बैठकर पूरा चिंतन करके श्रीमद्भागवत की कथा सुनी, इसलिए उसकी मुक्ति हो गई । कथा को सुनने से ही कल्याण नहीं होगा इस पर चिंतन करना आवश्यक है। जितनी भी अच्छी बातें हैं वह संसार में लिखी जा चुकी है अब केवल बचा है। उनको पालन करना कथा का आयोजन श्री वनस्थली खैल मैदान में कराया जा रहा है । कथा में क्षेत्र के सैंकड़ो श्रद्धालु पहले दिन ही उपस्थित हुए। जिससे पांडाल भरा रहा, कथाओं को सुनकर आनंदित हुए और भाव विभोर हो गए। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से 5:00 बजे तक है । आयोजक परिवार ने सभी से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हो कथा लाभ लेने की बात कही है।

