
सेवा, संघर्ष, समर्पण और जनकल्याण बदामी लाल साध जी
संवाददाता प्रवीण गौर नर्मदा पुरम//समाजसेवा की मिसाल – श्री बदामी लाल साध जी का प्रेरणादायक जीवन परिचय प्रेरणा स्रोत श्री बदामी लाल साध जी (पिता – स्वर्गीय श्री रामदीन साध जी) का जन्म 16 सितंबर 1956 को ग्राम सेल, तहसील डोलरिया, जिला नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने शिक्षा प्राप्त की तथा अपने परिश्रम, दृढ़ संकल्प और लगन से जीवन में सफलता प्राप्त की।
उन्होंने अपने क्षेत्र के शासकीय विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1986 में फिटर ट्रेड से आईटीआई उत्तीर्ण करने के बाद भारतीय रेलवे में कोच टेक्नीशियन के पद पर भुसावल से अपनी सेवाओं का शुभारंभ किया। ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण उन्होंने रेलवे सेवा में विशिष्ट पहचान बनाई। लगभग तीन दशकों तक राष्ट्रसेवा करने के पश्चात 30 सितंबर 2016 को वे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने विश्राम का मार्ग नहीं चुना, बल्कि अपने गाँव, किसानों और समाज की सेवा को ही अपना जीवन-धर्म बना लिया। वे वर्षों से किसानों के सुख-दुःख के साथी रहे हैं। किसानों की समस्याओं को शासन और प्रशासन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने अनेक बार धरना-प्रदर्शनों, आंदोलनों और जनजागरण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका उद्देश्य कभी व्यक्तिगत लाभ नहीं रहा, बल्कि किसानों को उनका अधिकार दिलाना और उनकी आवाज़ को मजबूती प्रदान करना रहा। कृषि से जुड़े हर मुद्दे पर उन्होंने निडर होकर किसानों का साथ दिया और सदैव उनके हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने विद्यालयों के विकास, विद्यार्थियों को प्रेरित करने तथा शिक्षकों के सहयोग में निरंतर अपना अमूल्य समय दिया। उनका विश्वास रहा है कि शिक्षा ही समाज के उज्ज्वल भविष्य की सबसे सशक्त आधारशिला है, और इसी भावना के साथ वे शिक्षा के उत्थान के लिए सदैव सक्रिय रहे।
सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याण के कार्यों में भी श्री बदामी लाल साध जी की भूमिका सदैव अग्रणी रही है। ग्राम के विकास, सामाजिक समरसता, धार्मिक आयोजनों, जनहित के कार्यों तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता में उन्होंने निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दिया। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने बिना किसी पद, प्रतिष्ठा या स्वार्थ की अपेक्षा के केवल सेवा को अपना धर्म माना।
श्री बदामी लाल साध जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा सम्मान धन या पद से नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष, ईमानदारी और मानवता से प्राप्त होता है। उनका जीवन किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण है।
आज वे केवल ग्राम सेल ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा, विश्वास और समाजसेवा के प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि यदि मन में सेवा का भाव और समाज के प्रति समर्पण हो, तो एक व्यक्ति भी अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।हम ऐसे कर्मयोगी, समाजसेवी, किसान हितैषी और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व श्री बदामी लाल साध जी को सादर नमन करते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर समाजहित में कार्य करने की शक्ति प्रदान करें। उनका संघर्षमय और सेवामय जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बना रहे।
