प्रदीप गुप्ता/नर्मदापुरम/शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में आज मंगलवार दिनाँक 29.11. 2022 को “वर्तमान परिपेक्ष्य में सौर ऊर्जा की उपादेयता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. वी. के. श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य शासकीय एम.वी.एम.. महाविद्यालय भोपाल, अध्यक्ष डॉ. एल.एल. दुबे पूर्व प्राचार्य शासकीय एम.जी.एम. महाविद्यालय, इटारसी. मुख्य वक्ता डॉ. तरूणा जैन विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रिकल विभाग यू.आई.टी. बरकतउल्ला विवि भोपाल, मुख्य वक्ता एम.के. खान म.प्र. ऊर्जा निगम अक्षय ऊर्जा केन्द्र नर्मदापुरम, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ श्रीमती कामिनी जैन, संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. अरूण सिकरवार, सहसमन्वयक डॉ. रश्मि श्रीवास्त ने मंच पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की। माँ सरस्वती की पूजन, दीप प्रज्जवलन एवं कन्या पूजन के साथ ही संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया गया। इस अवसर अंशिका गुप्ता एवं पूजा गोस्वामी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तत्पश्चात् मध्यप्रदेश गान एवं महाविद्यालयीन स्टॉफ ने अतिथियों का स्वागत सत्कार किया। हर्षा पुरोहित, वर्षा पुरोहित द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति दी गई। स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन ने कहा कि सौर ऊर्जा जीवन का आधार है यह एक ऐसा संसाधन है जो कि प्रचूर प्रदूषण रहित समाप्त न होने वाला निशुल्क साधन है। भविष्य में ऊर्जा समस्या को हल करने का एक मात्र विकल्प सौर ऊर्जा ही है। सौर ऊर्जा ऐसी ऊर्जा है जिसका बार-बार उपयोग किया जा सकता है तथा समाप्त होने का भी कोई डर नहीं है। सौर ऊर्जा से चलने वाले एवं उपयोगी उपकरण जैसे सोलर कुकर, सोलर लालटेन, सोलर जलपम्पन, सौरतापीय प्रणाली, सौर जल तापन आदि हैं। सोलर ऊर्जा का अन्य उपयोग सौर भवन तापन एवं शीतलन सौर तलाब, सौरकीयर, सौर आसवन, सौर शुष्मक आदि हैं। महा विद्यालय स्टॉफ एवं सभी छात्राएँ ऊर्जा साक्षरता एप ऊषा में नामांकित है। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त कर्मवीर शर्मा के निर्देशन में विद्यार्थियों को ऊषा एप के माध्यम से जागरूक किया गया। एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में वर्तमान परिपेक्ष्य में सौर ऊर्जा की उपादेयता पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया गया।विषय प्रवर्तन करते हुए समन्वयक डॉ. अरूण सिकरवार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकास का रथ जिन पहियों पर आगे बढ़ रहा है ऊर्जा उनमें से एक है जैसे-जैसे विकास कार्यों में प्रगति होती जाती है, ऊर्जा की आवश्यकता और खपत उसी गति से बढ़ती जाती है। आज विश्व के सामने बढ़ती आबादी के अलावा ऊर्जा का यक्ष मुख खोले खड़ा है, लेकिन विकास चक्र के गतिमान बने रहने के लिए निरंतर और अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती रहेगी। वर्तमान युग में वैज्ञानिक आधार है कि जो देश जितनी अधिक ऊर्जा का उपभोग करता है उसे उतना ही विकसित देश माना जाता है। देश के आर्थिक विकास प्रगति और सामाजिक जीवन स्तर में ऊर्जा का विशेष महत्व होता है, चाहे शहर हो या गांव घर हो या स्कूल या कार्यालय ऊर्जा हर जगह नीव का पत्थर है, इसलिये देश की सम्पन्नता का मापदण्ड के पैमाने के रूप में प्रति व्यक्ति ऊर्जा का आसत उपभोग व ऊर्जा के उत्पादन से लगाया जाता है। ऊर्जा के बिना जीवन संभव नहीं है लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए पोषण के बाद ऊर्जा को ही महत्वपूर्ण घटक माना गया है। ऊर्जा शरीर को कार्य करने की शक्ति प्रदान करती है।मुख्य वक्ता डॉ. तरूणा जैन विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रिकल विभाग यू.आई.टी. बरकतउल्ला विवि भोपाल ने पीपीटी के माध्यम से अपने व्याख्यान में बताया कि ऊर्जा के परम्परागत साधन एवं स्त्रोत पर जैसे कोयला, तेल, जलविद्युत, प्राकृतिक गैस और नाभिकीय ऊर्जा आदि पर अधिक निर्भर नहीं रहा जा सकता है क्योंकि आने वाले वर्षों में ऐसा अनुमान है कि ईंधन के यह परम्परागत स्त्रोत समाप्त हो जायेंगे। धीरे-धीरे एक बात स्पष्ट होकर सामने आ ही है कि, संसार में तेल के भण्डार धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों की खोज की आवश्यकता तीव्रता के साथ महसूस की जा रही है। मुख्य वक्ता एम. के. खान म.प्र ऊर्जा निगम अक्षय ऊर्जा केन्द्र नर्मदापुरम ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 50000 खरब किलोवाट सौर ऊर्जा प्राप्त होती है जो कि देश की कुल वार्षिक ऊर्जा खपत से भी सैंकड़ों गुना ज्यादा है। इस विशाल मात्रा का केवल 0.1 प्रतिशत भाग ही विश्व की ऊर्जा आवश्यकता पूर्ण करने में सक्षम है। भारत में 250-300 दिनों तक पर्याप्त धूप निकलती है। भारत के कई स्थानों पर सौर ऊर्जा की दैनिक उपलब्ध मात्रा 5-7 किलोवाट प्रतिघंटा प्रतिवर्गमीटर है करीब 3000 घंटे चमकदार सूर्य प्रकाश हर वर्ष राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मप्र तथा उत्तरी महाराष्ट्र को मिलता है। मुख्य अतिथि डॉ. व्ही. के. श्रीवास्तव ने बताया कि हमें प्राकृतिक चीजों का दोहन करना चाहिए ना कि शोषण प्रकृति प्रदत्त चीजों के दोहन की प्रेरणा हमें मधुमक्खी से लेना चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एल.एल. दुबे ने कहा कि सोलर ऊर्जा पर और अधिक शोध होने की आवश्यकता है हमें जनजागरूकता से लोगों को सौर ऊर्जा का सद्उपयोग करने हेतु प्रेरित करना होगा। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती आभा वाधवा एवं डॉ. आशीष साहगौरा ने किया एवं आभार डॉ रश्मि श्रीवास्तव ने किया। तकनीकि सत्र की अध्यक्षता डॉ. भारती दुबे ने की इस अवसर पर डॉ. मनीष चंद्र चौधरी, वैनीश डेनियल, मोनिका दीक्षित, राजी साध, अंकिता, पूर्वी सक्सेना, कल्पना गौर ने शोध पत्र का वाचन किया। समापन सत्र के मुख्य अतिथी डॉ. ओ. एन. चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की संगोष्ठी का विषय अत्यंत समयानुकूल है। हमें पुनः ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत सूर्य की ऊर्जा का संचयन कर सउपयोग करना होगा क्योकि जिस गति से ऊर्जा की खपत हो रही है कालांतर
में ऊर्जा संसाधनों का अभाव हो जायेगा। इस अवसर पर डॉ. वर्षा चौधरी, डॉ. भारती दुबे, डॉ. संगीता अहिरवार, डॉ. संध्या राय डॉ. श्रीकांत दुबे, डॉ. हर्षा चचाने, डॉ. पी.आर मानकर, कलाश डोंगरे, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. जी.सी. पाण्डे, डॉ. कंचना ठाकुर, डॉ. आर.वी. शाह, डॉ. सी.एस. राज, डॉ. वैशाली लाल, डॉ. ए. एस खान, डॉ. विनीत अग्रवाल, डॉ. मनीष चंद्र चौधरी, डॉ. निशा रिछारिया, शैलेन्द्र तिवारी, श्रीमती प्रीति ठाकुर, डॉ. श्रद्धा गुप्ता, धीरज खातरकर दुर्गेश राने, श्रीमती दीपिका राजपूत, शुभम भद्रे, डॉ. संगीता पारे, डॉ. कीर्ति दीक्षित, डॉ. नीतू पवार, डॉ. रीना मालवीय, डॉ. मधु विजय, कु. काजल बाथरे, डॉ. हेमंत चौधरी, डॉ. घनश्याम डेहरिया, रफीक अली, अजय तिवारी, डॉ. दशरथ मीना, डॉ. कीर्ति खरे, श्रीमती शीतल मेहरा, श्रीमती अंकिता तिवारी, कु. स्वेता वर्मा, श्रीमती नीलम चौधरी, डॉ. प्रगति जोशी, डॉ. प्रीति मालवीय, श्रीमती किरण विश्वकर्मा एवं छात्राएँ उपस्थित रही।
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