प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/(सीहोर) सीहोर नगर के गौरव दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर के इन्दौर नाका स्थित स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम योद्धा अमर शहीद कुंवर चैनसिंह की समाधि पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ उनके बेटे कार्तिकेय चौहान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, विदिशा सांसद रमाकांत भार्गव, भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक सुदेश राय, आष्टा विधायक रघुनाथ मालवीय, जिला भाजपा अध्यक्ष रवि मालवीय, जिला पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह इंजीनियर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी शहीद कुंवर चैनसिंह को नमन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान सीहोर स्थित चैन सिंह की छतरी पर पहुंचकर उनको पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारे देश के साथ-साथ प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के पहले सीहोर जिले में सन् 1824 में आजादी की एक मशाल जल उठी थी। इस मशाल का ज्वालामुखी रूप सन 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में पहचाना जाता है। कुंवर चैन सिंह ने अतुलनीय साहस का परिचय देते हुए अपने 41 सैनिकों के साथ आजादी के लिए हजारों अंग्रेजो से लड़ते हुए स्वयं को शहीद कर दिया। सीहोर के इन्दौर नाके पर बनी उनकी समाधि के साथ ही उनके विश्वस्त अंगरक्षक शाहिद जनाब हिम्मत खां और बहादुर खां की समाधि भी है। इतिहास है कि नरसिंहगढ़ के कुंवर चैनसिंह को सन 1824 में अंग्रेज जनरल द्वारा सीहोर बुलाया गया और अंग्रेजों से संधि करने के लिए विवश किया गया। अंग्रेजो से संधि नही करने पर अंग्रेजो द्वारा उन्हें बंदी बनाने की कोशिश की गई। तब स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले प्रथम योद्धा कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों का मुकाबला करना उचित समझा और अपने 41 सैनिकों के साथ अंग्रेजो का वीरता से सामना किया। उनके हमसफर सुरक्षा सैनिक बहादुर खां और हिम्मत खां सहित 41 सैनिकों ने वीरता से लड़ाई लड़ी और वीरगति को प्राप्त हो गए।

