
बबलू निरापुरे आमला
एडीएम की पहल पर शुरू हुआ था सुधार कार्य, बीच में ही बंद
आमला. शहर में वैसे ही खेल मैदान का अभाव है, जो मैदान है, वह भी बदहाली पर आंसू बहा रहे है। यह जरूर है कि रेलवे विभाग के स्टेडियम को पुन: संवारने का काम शुरू हुआ था, यह काम भी बीच में ही बंद कर दिया गया। जिसके पीछे एक कारण जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं देना है। दरअसल रेलवे अस्पताल के सामने रेलवे विभाग का स्टेडियम है, जो देखरेख के अभाव में खस्ताहाल हो गया है। रेलवे विभाग के एडीएम की पहल पर इस स्टेडियम में बैठक व्यवस्था, साफ-सफाई और चेंजिंग रूम आदि का सुधार कार्य प्रारंभ हुआ था, जिसका निरीक्षण करने सांसद और विधायक भी पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही सांसद-विधायक का निरीक्षण हुआ, दूसरे दिन से ही काम बंद कर दिया। जिससे अब अस्त-व्यस्त स्टेडियम में ही खिलाडिय़ों को अभ्यास करना पड़ रहा है। युवा खिलाड़ी गोल्डी ठाकुर,अमित यादव, ने बताया कि हाल यह है कि स्टेडियम के खंडहर हो चुके कुछ खिडकी-दरवाजों की मरम्मत के बाद से ठेकेदार ने काम को बंद कर दिया है, इसे पूरा करने में अधिकारी भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। यहीं वजह है कि बेइंतजामों के चलते खिलाड़ी मैदान में खेलकर खुद घायल हो रहे हैं।
स्टेडियम के लिए बजट भी तैयार …………..
शहर में तहसील के सामने जमीन पर स्टेडियम निर्माण की घोषणा आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने की थी। इसके लिए बजट भी है, लेकिन अचानक जमीन का पेंच के कारण स्टेडियम नहीं बन पा रहा है। युवा खिलाडिय़ों का कहना है कि जमीनी पेंच को सुलझाने के लिए न सांसद-विधायक पहल कर रहे है और न ही अन्य जनप्रतिनिधि दिलचस्पी ले रहे। जिसके कारण खिलाडिय़ों को अच्छा प्लेटफार्म नहीं मिल पा रहा। जबकि शहर और ब्लाक में कई ऐसे भी खिलाड़ी है, जिन्होंने राज्य स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, किन्तु अफसोस अभ्यास के अभाव में खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाये। जिसकी एक वजह शहर में अच्छा खेल मैदान या स्टेडियम का अभाव है।
खिलाडिय़ों में बढ़ता जा रहा रोष …………..
शहर में बेहतर और सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम (खेल मैदान) नही होने के कारण खिलाडिय़ों में रोष बढ़ता जा रहा है। युवा खिलाड़ी गोल्डी ठाकुर का कहना है कि संसाधनों के अभाव में बच्चे खेल नहीं पा रहे हैं। उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पा रही है। हौसला तो है मगर अव्यवस्था के चलते वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण स्टेडियम का निर्माण शुरू नही हो सका है। वहीं रेलवे विभाग का स्टेडियम भी अव्यवस्थाओं का शिकार है। रेलवे के स्टेडियम में जगह-जगह झाडिय़ां उग गई है और गंदगी पसरी रहती है। कहीं-कहीं तो बड़े-बड़े गड्ढे में पानी थमा है। वहीं सुधार का कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया। जिससे खिलाडिय़ों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अभ्यास करने नहीं जाते युवा ……………
रेलवे विभाग के स्टेडियम का सुधार कार्य तो प्रारंभ किया गया, लेकिन अब तक न तो जमीन का समतलीकरण कराया गया और न ही उसमें हरी घास बिछवाई गई। मैदान के नाम पर सिर्फ खाली जमीन ही नजर आ रही है। खिलाड़ी जब यहां खेलने के लिए पहुंचते हैं तो यहां केवल झाडिय़ां ही नजर आती है। झाडिय़ों की वजह से खिलाडिय़ों को खेलने के लिए जगह नहीं है। स्टेडियम को सही कराने के लिए युवा खिलाड़ी कई बार रेलवे विभाग से मांग भी कर चुके है और एडीएम ने काम भी शुरू करवाया था, किन्तु काम पूरा कराने अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। जिससे युवा खिलाडिय़ों की समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है।
इनका कहना है………….
रेलवे विभाग के एडीएम की पहल पर स्टेडियम का सुधार कार्य प्रारंभ किया था, किस कारण से बंद है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। रेलवे अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
राजेन्द्र उपाध्याय, सदस्य, रेलवे सलाहकार समिति, आमला।
